कल भक्तों को दर्शन देने रथ पर विराजमान होंगे जगत के नाथ महाप्रभु जगन्नाथ
धर्मनगरी कवर्धा में 16 जुलाई को निकलेगी भगवान श्री जगन्नाथ जी की भव्य रथयात्रा, तैयारियां अंतिम चरण में
कवर्धा खबर योद्धा।। धर्मनगरी कवर्धा में विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी आषाढ़ शुक्ल द्वितीया, गुरुवार 16 जुलाई को भगवान श्री जगन्नाथ, बड़े भाई श्री बलभद्र एवं बहन देवी सुभद्रा की भव्य रथयात्रा श्रद्धा, भक्ति एवं उल्लास के साथ निकाली जाएगी। श्री जगन्नाथ रथयात्रा आयोजन समिति द्वारा रथ निर्माण, साज-सज्जा, सुरक्षा एवं समस्त व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

आयोजन समिति के सदस्य विकाश केशरी ने बताया की रथयात्रा से पूर्व भगवान श्री जगन्नाथ, श्री बलभद्र एवं माता सुभद्रा के विग्रहों का वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विशेष पूजन कर उन्हें सुसज्जित रथ पर विराजमान कराया जाएगा। इसके पश्चात महाप्रभु नगर भ्रमण के लिए प्रस्थान करेंगे और शहर के प्रमुख मार्गो से होकर हजारों श्रद्धालुओं को दर्शन देंगे।
रथयात्रा से जुड़ी प्रमुख धार्मिक मान्यताएं
● आषाढ़ शुक्ल द्वितीया का महत्व:
सचिन श्रीवास्तव ने बताया की इसी पावन तिथि पर भगवान श्री जगन्नाथ अपने भाई श्री बलभद्र एवं बहन देवी सुभद्रा के साथ भक्तों को दर्शन देने नगर भ्रमण पर निकलते हैं। यह तिथि सनातन परंपरा में अत्यंत शुभ और पुण्यदायी मानी गई है।
● छेरा पहरा (झाड़ू सेवा):
रथयात्रा का सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान छेरा पहरा है, जिसमें भगवान के रथ के समक्ष झाड़ू लगाकर सेवा की जाती है। यह संदेश देता है कि भगवान के सामने राजा और सामान्य व्यक्ति सभी समान हैं तथा सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।
● विग्रह दर्शन का महत्व:
मान्यता है कि जो भक्त रथ पर विराजमान भगवान श्री जगन्नाथ, श्री बलभद्र एवं माता सुभद्रा के दर्शन करते हैं, उन्हें विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है तथा भगवान की कृपा उनके जीवन पर बनी रहती है।
● रथ की रस्सी खींचने का पुण्य:
विकाश केशरी ने बताया की धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान के रथ की रस्सी खींचने से अनेक जन्मों के पापों का क्षय होता है तथा जीवन में सुख, समृद्धि और मंगल का आगमन होता है।
● मौसी माँ (गुंडिचा) मंदिर की यात्रा:
रथयात्रा के दौरान भगवान श्री जगन्नाथ, श्री बलभद्र एवं माता सुभद्रा अपने मौसी माँ के घर (गुंडिचा मंदिर) जाते हैं। यह यात्रा भगवान के भक्तों के बीच आने तथा अपने मौसी के घर विश्राम करने की दिव्य परंपरा का प्रतीक है। भगवान वहां सात दिन तक विराजमान रहते हैं।
इस वर्ष महाप्रभू जगन्नाथ जी की सेवा का सौभाग्य आशीष दुबे परिवार को प्राप्त हुआ है, भगवान का मौसी के घर विश्राम करने की परम्परा इस वर्ष उनके ही निवास मे पूरी होंगी.
● काढ़ा (औषधीय पेय) सेवन की परंपरा:
स्नान पूर्णिमा के बाद भगवान श्री जगन्नाथ अस्वस्थ होने की लीला करते हैं और विश्राम करते हैं। रथयात्रा के समय उन्हें पारंपरिक औषधीय काढ़ा अर्पित किया जाता है, जो भगवान की आरोग्यता एवं लोककल्याण का प्रतीक माना जाता है।
भक्ति से सराबोर होगी धर्मनगरी
रथयात्रा श्री जगन्नाथ मंदिर से प्रारंभ होकर शहर के प्रमुख मार्गों से निकलेगी। भजन-कीर्तन, जसगीत, भक्तिमय गीतों के साथ एवं “जय जगन्नाथ” के उद्घोष से पूरा नगर भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहेगा।
सभी तैयारियां अंतिम चरण में हैं।
सुधीर केशरवानी, जितेन्द्र नामदेव , भावेश मिश्रा , कैलाश शर्मा, जीतेन्द्र वैष्णव, नीरज श्रीवास्तव,सचिन श्रीवास्तव, नीरज श्रीवास्तव ,आशीष दुबे,राजेश गुप्ता, आकाश यदु,सौरभ सिंह,अविनाश गुप्ता, अतुल पाण्डेय समेत आयोजक समिति के सदस्य तैयारी मे लगे हुए है ।
श्री जगन्नाथ रथयात्रा आयोजन समिति ने समस्त श्रद्धालुओं एवं धर्मप्रेमी नागरिकों से अपील की है कि वे सपरिवार रथयात्रा में सम्मिलित होकर भगवान श्री जगन्नाथ, श्री बलभद्र एवं माता सुभद्रा के दिव्य दर्शन करें, रथ की रस्सी खींचने का पुण्य लाभ प्राप्त करें तथा छेरा पहरा (झाड़ू सेवा) एवं अन्य पावन परंपराओं के साक्षी बनकर धर्मनगरी कवर्धा की इस ऐतिहासिक रथयात्रा को सफल बनाएं।




