समय पर इलाज से सर्पदंश पीड़ित 4 वर्षीय मासूम को मिला नया जीवन, 8 दिन बाद स्वस्थ होकर घर लौटा
कवर्धा खबर योद्धा।। जिला चिकित्सालय कबीरधाम में सर्पदंश से पीड़ित 4 वर्षीय बालक का सफल उपचार कर उसे पूरी तरह स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। विशेषज्ञ चिकित्सकों की तत्परता, समय पर उपचार और लगातार आठ दिनों तक की गई निगरानी से मासूम की जान बचाई जा सकी।

जानकारी के अनुसार, विकासखंड बोड़ला के ग्राम कुकरापानी निवासी 4 वर्षीय महेश बैगा को 20 जुलाई को सर्पदंश के बाद प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तरेगांव से गंभीर हालत में जिला चिकित्सालय कवर्धा रेफर किया गया था। भर्ती के समय उसके चेहरे पर अत्यधिक सूजन और आंखों में रक्तस्राव की स्थिति थी। चिकित्सकों ने तत्काल उपचार शुरू करते हुए एंटी स्नेक वेनम सहित आवश्यक दवाइयां दीं और लगातार स्वास्थ्य की निगरानी की।
मामले की गंभीरता को देखते हुए उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने भी जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को बालक के बेहतर एवं त्वरित उपचार के निर्देश दिए थे। इसके बाद विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने पूरी गंभीरता के साथ इलाज किया, जिससे बालक की स्थिति में लगातार सुधार हुआ और आठ दिन बाद उसे स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।
इस सफल उपचार में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. सलिल मिश्रा, फैमिली मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. हर्षित टुवानी, डॉ. आशुतोष कुमार सहित जिला चिकित्सालय के नर्सिंग एवं सहयोगी स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
डॉ. हर्षित टुवानी ने कहा कि सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक या घरेलू उपचार में समय गंवाने के बजाय मरीज को तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाना चाहिए। वहीं डॉ. सलिल मिश्रा ने बताया कि बच्चों में सर्पदंश तेजी से गंभीर रूप ले सकता है, इसलिए समय पर एंटी स्नेक वेनम और विशेषज्ञ उपचार जीवन बचाने में बेहद प्रभावी होता है।
सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक डॉ. केशव ध्रुव ने बताया कि जिला चिकित्सालय कबीरधाम में सर्पदंश के उपचार के लिए एंटी स्नेक वेनम, आवश्यक दवाइयां और प्रशिक्षित चिकित्सकों की टीम 24 घंटे उपलब्ध रहती है। उन्होंने वर्षा ऋतु में ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों से खेतों, जंगलों और घास वाले क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतने तथा सर्पदंश की स्थिति में बिना देरी किए शासकीय अस्पताल पहुंचने की अपील की।
स्वास्थ्य विभाग ने भी नागरिकों से सर्पदंश जैसी आपात स्थिति में झाड़-फूंक के बजाय वैज्ञानिक उपचार अपनाने और समय पर अस्पताल पहुंचने की सलाह दी है, ताकि अधिक से अधिक मरीजों की जान बचाई जा सके।







