भोरमदेव कॉरिडोर की रफ्तार संकरी सड़क पर अटकी, कवर्धा–सरोदा–भोरमदेव मार्ग के चौड़ीकरण का एक दशक से इंतजार
कॉरिडोर बन रहा, लेकिन पहुंच मार्ग बदहाल; सावन में हजारों श्रद्धालु जाम और जोखिम के बीच तय कर रहे सफर, टू-लेन सड़क की मांग फिर हुई तेज
कवर्धा खबर योद्धा।। भोरमदेव कॉरिडोर को प्रदेश की महत्वाकांक्षी पर्यटन परियोजनाओं में शामिल कर तेजी से विकसित किया जा रहा है, लेकिन कॉरिडोर तक पहुंचने वाला प्रमुख कवर्धा–सरोदा–भोरमदेव मार्ग आज भी चौड़ीकरण की बाट जोह रहा है। लगभग एक दशक से इस सड़क को टू-लेन बनाने की मांग लगातार उठ रही है, लेकिन अब तक मामला केवल आश्वासनों और सर्वे तक ही सीमित है। ऐसे में सवाल उठने लगा है कि जब करोड़ों रुपये खर्च कर पर्यटन को नई पहचान देने की तैयारी हो रही है, तब वहां तक पहुंचने वाला मुख्य मार्ग ही संकरा रहेगा तो परियोजना का पूरा लाभ आखिर कैसे मिलेगा।

श्रद्धालुओं से लेकर पर्यटकों तक सभी इसी मार्ग पर निर्भर
कवर्धा से सरोदा होते हुए विश्व प्रसिद्ध भोरमदेव मंदिर, रामचूवा और आसपास के प्रमुख धार्मिक एवं प्राकृतिक पर्यटन स्थलों तक पहुंचने का यही मुख्य मार्ग है। प्रतिदिन सैकड़ों वाहन और हजारों लोग इसी रास्ते से आवागमन करते हैं। सुबह पुलिस भर्ती और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवा इसी सड़क पर दौड़ लगाते हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोग मॉर्निंग वॉक और साइकिलिंग के लिए भी यहां पहुंचते हैं। छुट्टियों, सावन और अन्य धार्मिक आयोजनों के दौरान इस मार्ग पर यातायात का दबाव कई गुना बढ़ जाता है।

सावन में बढ़ी परेशानी, जाम और दुर्घटना का बना रहता है खतरा
सावन माह में भोरमदेव महादेव और रामचूवा मंदिर में जलाभिषेक के लिए प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। संकरी सड़क पर भारी और छोटे वाहनों की बढ़ती आवाजाही के कारण कई स्थानों पर जाम की स्थिति बन जाती है। वाहन चालकों और श्रद्धालुओं का कहना है कि सड़क चौड़ी नहीं होने से हर यात्रा जोखिम भरी साबित होती है। उनका मानना है कि यदि समय रहते इसे टू-लेन बना दिया जाता तो दुर्घटनाओं की आशंका भी काफी हद तक कम हो सकती थी।

दस से अधिक गांवों की जीवनरेखा, विकास भी इसी पर निर्भर
यह मार्ग केवल पर्यटन का रास्ता नहीं, बल्कि लालपुर, खरबना, कापा, चिमरा, हाथीडोब, सिंघनपुरी, बैंदरची, मादाघाट सहित दस से अधिक गांवों की जीवनरेखा भी है। शिक्षा, स्वास्थ्य, खेती-किसानी, व्यापार और रोजगार के लिए ग्रामीण प्रतिदिन इसी सड़क का उपयोग करते हैं। सड़क की सीमित चौड़ाई के कारण लोगों को रोजाना कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

सर्वे हो चुका, अब निर्माण शुरू होने का इंतजार
जानकारी के अनुसार कोरोना काल में सड़क चौड़ीकरण को लेकर प्रारंभिक निरीक्षण किया गया था। वर्ष 2025-26 में एक बार फिर मार्ग का सर्वे भी कराया गया, लेकिन निर्माण कार्य अब तक शुरू नहीं हो सका। इस बीच भोरमदेव कॉरिडोर और अभ्यारण्य के विकास से पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि अब केवल सर्वे नहीं, बल्कि निर्माण कार्य शुरू करने का समय आ गया है। उनका मानना है कि कवर्धा–सरोदा–भोरमदेव मार्ग का टू-लेन निर्माण केवल सड़क परियोजना नहीं, बल्कि पूरे भोरमदेव पर्यटन क्षेत्र, स्थानीय व्यापार, रोजगार और ग्रामीण विकास को नई गति देने वाला निर्णायक कदम साबित होगा।







