भोरमदेव अभ्यारण में जंगल के राजा का दिखा शाही अंदाज अब शावकों के साथ बाघिन की मौजूदगी

भोरमदेव अभ्यारण में जंगल के राजा का दिखा शाही अंदाज अब शावकों के साथ बाघिन की मौजूदगी

भोरमदेव के जंगलों में फिर गूंजी बाघों की दहाड़, शावकों संग बाघिन की मौजूदगी ने बदली जंगल की तस्वीर

 

कवर्धा खबर योद्धा।। कबीरधाम जिले के भोरमदेव अभयारण्य क्षेत्र से सामने आई बाघ की ताजा तस्वीरों ने पूरे क्षेत्र में नई उम्मीद और उत्साह भर दिया है। लंबे समय बाद यहां बाघों की सक्रिय मौजूदगी दर्ज हुई है,

 एक बाघिन अपने दो शावकों के साथ बेखौफ विचरण करती नजर आई है। वन विभाग के ट्रैप कैमरों में कैद यह दृश्य केवल रोमांचक नहीं, बल्कि इस बात का ठोस प्रमाण है कि भोरमदेव का जंगल अब फिर से संतुलित, समृद्ध और जीवंत पारिस्थितिकी तंत्र की ओर लौट रहा है। यह बदलाव केवल वन्यजीवों की उपस्थिति तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र के पर्यावरणीय संतुलन में सुधार का संकेत भी दे रहा है।

 

जंगल की सेहत का सबसे बड़ा संकेत

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी जंगल में बाघ की मौजूदगी उस क्षेत्र की पारिस्थितिकी की मजबूती का सबसे बड़ा संकेत मानी जाती है। बाघ तभी किसी क्षेत्र में टिकते हैं, जब वहां पर्याप्त शिकार, जल स्रोत और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध हो। भोरमदेव में बाघिन का अपने शावकों के साथ लंबे समय तक रहना इस बात को प्रमाणित करता है कि जंगल अब केवल गुजरने का रास्ता नहीं, बल्कि स्थायी आवास बनता जा रहा है।

कैमरों में कैद हुई गतिविधियां, बढ़ी हलचल

वन विभाग द्वारा लगाए गए ट्रैप कैमरों में बाघिन और उसके दो शावकों की गतिविधियां स्पष्ट रूप से दर्ज हुई हैं। इन तस्वीरों में उनका स्वाभाविक व्यवहार दिखाई दे रहा है, जिससे यह स्पष्ट है कि वे यहां पूरी तरह सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। इसके अलावा तेंदुओं की संख्या में भी वृद्धि दर्ज की गई है और उनके भी मूवमेंट कैमरों में कैद हुए हैं। कई स्थानों पर बाघों के पगमार्क मिले हैं, जो उनकी सक्रिय मौजूदगी की पुष्टि करते हैं।

भोरमदेव बना नया ठिकाना

विशेषज्ञों का मानना है कि मध्यप्रदेश के कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में बाघों की बढ़ती संख्या के कारण अब वे नए और शांत आवास की तलाश में भोरमदेव जैसे क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं। पहले भी बाघिनें यहां प्रजनन के लिए आती थीं, लेकिन आमतौर पर शावकों को जन्म देने के बाद लौट जाती थीं। इस बार उनका लंबे समय तक टिके रहना इस क्षेत्र की बढ़ती उपयुक्तता को दर्शाता है।

स्थानीयों में उत्साह, बढ़ी जिम्मेदारी

बाघों की वापसी से स्थानीय लोगों और प्रकृति प्रेमियों में उत्साह का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों बाद जंगल में इस तरह की हलचल देखने को मिल रही है। हालांकि इसके साथ ही वन विभाग की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका को देखते हुए विभाग द्वारा लगातार निगरानी रखी जा रही है और आसपास के क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाई गई है।

पर्यटन को मिल सकता है बड़ा बढ़ावा

भोरमदेव में बाघों की बढ़ती मौजूदगी आने वाले समय में पर्यटन के लिए भी बड़ा अवसर बन सकती है। पहले से प्रस्तावित जंगल सफारी योजना को इससे और मजबूती मिलने की संभावना है। यदि पर्यावरण संतुलन बनाए रखते हुए पर्यटन को बढ़ाया गया, तो स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिल सकते हैं और क्षेत्र की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत हो सकती है। भोरमदेव के जंगलों में बाघों की वापसी यह साबित करती है कि यदि संरक्षण के प्रयास सही दिशा में किए जाएं, तो प्रकृति खुद को फिर से जीवंत कर सकती है। 

जितेन्द्र राज नामदेव

एडिटर इन चीफ - खबर योद्धा

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