भोरमदेव मंदिर में ‘महाचतुर शुद्धि सहस्र कलशम्’ का भव्य समापन: 1008 कलशों से हुआ महाअभिषेक, शास्त्रीय नृत्य से हुई शिव आराधना
कवर्धा खबर योद्धा।। छत्तीसगढ़ के ‘खजुराहो’ के नाम से प्रसिद्ध ऐतिहासिक भोरमदेव महादेव मंदिर में पिछले पांच दिनों से चल रहे ‘महाचतुर शुद्धि सहस्र कलशम्-2026’ का आज (बुधवार) गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर भव्य समापन हो गया। श्री महा दिव्य देशम् फाउंडेशन (एसएमडीडीएफ) और भोरमदेव सनातन तीर्थ समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस महाअनुष्ठान के अंतिम दिन वैदिक मंत्रोच्चार के बीच 1008 पवित्र कलशों के जल से भगवान भोरमदेव का महाअभिषेक संपन्न किया गया।
नृत्य व संगीत से शिव आराधना

समापन के अवसर पर उषा पूजा, शिवलिंग निमज्जनम् और सायंकाल श्रीचक्र पूजा विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। भगवान शिव के नटराज स्वरूप को समर्पित विशेष शास्त्रीय नृत्य और संगीत के जरिए आराधना की गई। केरल से आए आचार्यों द्वारा पारंपरिक वाद्ययंत्रों— नादस्वरम, चेंडा और मृदंगम की मंगलध्वनि के बीच प्रस्तुत की गई नृत्य अर्चना से संपूर्ण मंदिर परिसर शिवमय हो गया। सनातन परंपरा में इस तरह की संगीत व नृत्य अर्चना को ईश्वर उपासना का अत्यंत दिव्य माध्यम माना जाता है।
उपमुख्यमंत्री ने किए दर्शन, संपन्न हुए दुर्लभ अनुष्ठान
अनुष्ठान के पांचवे दिन प्रदेश के उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष श्री राजीव लोचन महाराज, विहिप के प्रांत प्रमुख डॉ ललित माखीजा, जिला पंचायत अध्यक्ष ईश्वरी साहू, उपाध्यक्ष कैलाश चंद्रवंशी, नगर पालिका अध्यक्ष चंद्र प्रकाश चंद्रवंशी, नितेश अग्रवाल, श्रीकांत उपाध्याय, बैगा समाज से कामू बैगा, कांग्रेस नेता तुकाराम चंद्रवंशी समेत भगवान भोरमदेव के दर्शन कर विशेष पूजा-अर्चना की तथा प्रदेश की सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।
आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बनेगा भोरमदेव
एसएमडीडीएफ के संस्थापक श्री आर.आर. जी ने बताया कि इस महाअनुष्ठान का मूल उद्देश्य भोरमदेव मंदिर को केवल एक पर्यटन या आस्था के केंद्र तक सीमित न रखकर, इसे वैदिक ज्ञान और शैव आगम परंपरा के जीवंत आध्यात्मिक ऊर्जा केंद्र के रूप में पुनः स्थापित करना है। देव प्रेरणा से संपन्न हो रहे इस आयोजन से पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक चेतना का पुनर्जागरण हो रहा है।







