जीडीपी वृद्धि और अर्थव्यवस्था के सरकारी दावें ज़मीनी हालत और वास्तविकता के विपरीत, फार्मूला बदलकर असल आंकड़े छुपाये जा रहे

जीडीपी वृद्धि और अर्थव्यवस्था के सरकारी दावें ज़मीनी हालत और वास्तविकता के विपरीत, फार्मूला बदलकर असल आंकड़े छुपाये जा रहे

रायपुर खबर योद्धा विद्या भूषण दुबे ।। केंद्र सरकार द्वारा जारी पहली तिमाही के जीडीपी विकास दर के आंकड़ों को लेकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि ये आंकड़े अर्थव्यवस्था की वास्तविक और ज़मीनी स्थिति को नहीं दर्शाते, बल्कि बढ़ती असमानता का एक ’बड़ा विकृत चित्र’ पेश करते हैं।

 

इस सरकार से जीडीपी सम्हाल नहीं रहा है तो फार्मूला बदलकर और असल आंकड़े छुपाकर झूठे दावे कर रही है। पूंजीवादी मोदी सरकार के अर्थव्यवस्था का लाभ चुनिंदा बड़े कॉरपोरेट्स तक सीमित है, जिससे आम वेतनभोगी वर्ग की वास्तविक आय में गिरावट आई है। असल में घरेलू बचत की दर घटी है और परिवारों पर कर्ज का बोझ ऐतिहासिक रूप से बढ़ा है। जीडीपी ग्रोथ केवल उत्पादन दर्शाती है, रोजगार नहीं, मोदी सरकार में बेरोजगारी ऐतिहासिक शिखर पर है, विदेशी निवेश कम हुए हैं, निर्यात घट रहा है, आयात पर निर्भरता बढ़ रही है, असेंबलिंग को मैन्युफैक्चरिंग बताया जा रहा है, हर तरह से आंकड़ों की बाजीगरी करके अपनी अक्षमता और नाकामी को छुपाने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है।

 

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि आर्थिक गतिविधियों का दायरा बड़ा दिखाने के लिए भाजपा की सरकार ने जीडीपी की गणना पद्धति ही बदल दी है। 2015 में मोदी सरकार ने भारत के जीडीपी की गणना की पद्धति में पांच बड़े बदलाव किए। पहले जीडीपी की गणना के लिए बेस ईयर 2004-05 को आधार वर्ष माना जाता था। जब आधार वर्ष नया किया जाता है, तो उसमें आधुनिक उद्योगों, नई सेवाओं और बदले हुए उपभोग पैटर्न को शामिल किया जाता है, लेकिन मोदी सरकार ने अपने अनुकूल आंकड़ों के लिए इसमें भी हेरफेर किया। दूसरा बड़ा बदलाव जीडीपी की जो गणना उत्पादन लागत पर की जाती थी उसे मार्केट प्राइस पर कर दिया, इसके तहत अब जीवीए (Gross Value Added) में अप्रत्यक्ष करों (Indirect Taxes) को जोड़ा जाता है और सब्सिडी (Subsidies) को घटाया जाता है। करों के जुड़ने से GDP का अंतिम आंकड़ा बड़ा हो जाता है। तीसरा परिवर्तन डेटा जुटाने के नए सोर्स MCA21 डेटाबेस का इस्तेमाल करके किया गया। पहले विनिर्माण (Manufacturing) और कॉर्पाेरेट सेक्टर की ग्रोथ नापने के लिए कम कंपनियों के सैंपल और IIP (Index of Industrial Production) व ASI डेटा का सहारा लिया जाता था अब कॉर्पाेरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) के MCA21 ऑनलाइन डेटाबेस को शामिल किया गया है। इससे लगभग 5 लाख से अधिक पंजीकृत कंपनियों के वित्तीय खातों को सीधे GDP गणना में जोड़ दिया गया है। चौथा परिवर्तन वित्तीय और असंगठित क्षेत्र के दायरे का विस्तार करके किया गया है जिसके तहत बैंकिंग, फाइनेंस, शेयर ब्रोकिंग, म्यूचुअल फंड, पेंशन फंड,SEBI व IRDAIजैसी नियामक संस्थाओं की गतिविधियों को व्यापक रूप से जोड़ा गया है। केवल फसल उत्पादन के बजाय अब पशुपालन, डेयरी, और कृषि के मूल्य संवर्धन को भी जोड़ लिया गया है। पांचवां बड़ा बदलाव लेबर इनपुट का तरीका बदल कर किया गया है। पहले सभी प्रकार के श्रम/मजदूरों को एक ही पैमाने पर मापा जाता था, अब ’इफेक्टिव लेबर इनपुट’ मॉडल लागू किया गया, जिसमें कुशल, अकुशल, मालिक और सहायकों की उत्पादकता के हिसाब से अलग-अलग वेटेज दिया गया है, इस बदलाव के असर से ही आंकड़ों में उछाल दिख रहा है। पुरानी पद्धति में वास्तविक आंकड़े 7.8 नहीं बल्कि 5 प्रतिशत से नीचे हैं।

 

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि औसत वार्षिक GDP वृद्धि दर के मामले में मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार का दौर बेहतर रहा जिसमें यूपीए के 10 सालों में औसतन 7.5 प्रतिशत से 8 प्रतिशत की वास्तविक दर से वृद्धि हुई। महंगाई नियंत्रित रही, रोजगार के अवसर बढ़े, गरीबी कम हुई। मोदी सरकार अर्थव्यवस्था के विनाश को विकास बताने में तुली हुई है। मोदी राज के 12 सालों में देश पर कर्ज का भार चार गुना बढ़ा है, देश में गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वालों की संख्या बीते 12 वर्षों में 24 करोड़ 80 लाख से बढ़कर 81 करोड़ से अधिक हो गई है। एक प्रतिशत लोगों के पास देश की कुल संपत्ति का 40 प्रतिशत से अधिक संग्रहण हो चुका है, एनएसओ द्वारा जारी रिपोर्ट में देश का एक आम किसान परिवार की शुद्ध बचत मात्र 27 प्रतिदिन रह गई है। वर्तमान सरकार अपनी नाकामी छुपाने के लिए तरत-तरह के बहाने तलाश रही हैं!

जितेन्द्र राज नामदेव

एडिटर इन चीफ - खबर योद्धा

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