ज्ञानेश कुमार को हथकड़ी पहनाकर कांग्रेसियों ने किया अनोखा प्रदर्शन, पुतला दहन कर उठाए चुनावी पारदर्शिता पर सवाल

ज्ञानेश कुमार को हथकड़ी पहनाकर कांग्रेसियों ने किया अनोखा प्रदर्शन, पुतला दहन कर उठाए चुनावी पारदर्शिता पर सवाल

कवर्धा खबर योद्धा।। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी एवं छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर जिला कांग्रेस कमेटी कबीरधाम के अध्यक्ष नवीन जायसवाल के नेतृत्व में बुधवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शहर में पैदल मार्च निकालकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला दहन किया। कांग्रेस भवन से शुरू हुआ मार्च बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा स्थल तक पहुंचा, जहां कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के प्रतीकात्मक पुतले को हथकड़ी पहनाकर अनोखे अंदाज में अपना विरोध दर्ज कराया। कांग्रेस ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) सहित चुनावी प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न निर्णयों पर सवाल उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे तथा मुख्य निर्वाचन आयुक्त के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की।

जिला कांग्रेस कमेटी कबीरधाम के अध्यक्ष नवीन जायसवाल ने कहा कि आज देश की जनता के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि केंद्र और भाजपा शासित राज्य सरकारों को लगातार जनविरोधी फैसले लेने का आत्मविश्वास आखिर कहां से मिल रहा है। किसान, युवा और आम जनता महंगाई सहित अनेक समस्याओं से जूझ रहे हैं, लेकिन सरकार जनता की परेशानियों और विरोध को नजरअंदाज कर रही है।

उन्होंने कहा कि आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि से आम जनता का बजट प्रभावित हो रहा है। वहीं, विकास एवं निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार के आरोपों पर भी सरकार को जवाब देना चाहिए।

नवीन जायसवाल ने कहा कि कांग्रेस चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल उठा रही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता बेहद महत्वपूर्ण है। यदि चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं, तो उनका जवाब तथ्यों और पारदर्शिता के साथ दिया जाना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, “जब सैंया भय चुनाव आयोग, तो डर काहे का?” कांग्रेस का कहना है कि देश की जनता इन सवालों का जवाब चाहती है।

नवीन जायसवाल ने कहा कि द इंडियन एक्सप्रेस की 25 सितंबर 2026 की एक रिपोर्ट में निर्वाचन आयोग की निर्णय प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले दस महीनों में कम-से-कम 14 बार आयोग के कुछ निर्णयों पर औपचारिक आपत्ति दर्ज की।

उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने तथा मतदाता सूची से संबंधित आईटी प्रणाली के केंद्रीकरण जैसे मुद्दों का उल्लेख किया गया है। यदि निर्वाचन आयोग जैसी संवैधानिक संस्था के भीतर ही निर्णय प्रक्रिया को लेकर आपत्तियां सामने आती हैं, तो देश की जनता को इन विषयों पर स्पष्ट और पारदर्शी जानकारी मिलनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता, निर्वाचन प्रक्रिया की निष्पक्षता और संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता लोकतंत्र की बुनियाद हैं। इनसे जुड़े सवालों का समाधान जवाबदेही और पारदर्शिता के माध्यम से किया जाना चाहिए।

पूर्व अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक प्रत्याशी नीलू चंद्रवंशी ने कहा कि कांग्रेस और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लंबे समय से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) तथा चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाते रहे हैं।

उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग के दो आयुक्तों द्वारा दर्ज आपत्तियों से संबंधित रिपोर्ट सामने आने के बाद इन मुद्दों पर सार्वजनिक बहस और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता और बढ़ गई है। निर्वाचन आयोग को सामने आए सवालों पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि जनता का लोकतांत्रिक संस्थाओं पर विश्वास बना रहे।

पूर्व विधायक ममता चंद्राकर ने कहा कि कांग्रेस की मांग है कि निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े सभी निर्णयों में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता बनाए रखना और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करना लोकतंत्र की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

 पूर्व अध्यक्ष होरीराम साहू ने कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत जनता का मताधिकार है। जिस वोट के दम पर सरकारें बनती हैं, उसी वोट की निष्पक्षता और सुरक्षा को लेकर सवाल उठना गंभीर विषय है। निर्वाचन आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की जिम्मेदारी है कि वह देश के प्रत्येक मतदाता का विश्वास बनाए रखे और चुनावी प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाए।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता का वोट सर्वोपरि है। मतदाता सूची से जुड़े किसी भी निर्णय पर संदेह की स्थिति उत्पन्न होने पर उसका समाधान तथ्यों, पारदर्शिता और जवाबदेही के आधार पर होना चाहिए। प्रत्येक पात्र नागरिक को अपने मताधिकार का उपयोग करने का अवसर मिलना लोकतांत्रिक व्यवस्था की अनिवार्य शर्त है।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि जनता के मत से प्राप्त जनादेश की होती है। जनता के मत की सुरक्षा और निर्वाचन प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करना प्रत्येक संवैधानिक संस्था की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र, संविधान और मताधिकार की रक्षा के लिए पार्टी अपनी आवाज बुलंद करती रहेगी।

इस विरोध प्रदर्शन में पूर्व अध्यक्ष महेश चंद्रवंशी, जिला कांग्रेस कमेटी के महामंत्री गोपाल चंद्रवंशी, ब्रजेश चन्द्रवंशी,ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष घनश्याम साहू, मणिकांत त्रिपाठी, प्रभाती मरकाम, छबिलाल वर्मा, चेतन वर्मा, शौंकी साहू एवं उत्तरा दिवाकर, महिला कांग्रेस जिला अध्यक्ष सीमा अनंत, शहर अध्यक्ष नारायणी तोंडर, किसान कांग्रेस अध्यक्ष रवि चंद्रवंशी, सेवादल अध्यक्ष पदुम सेन, आकाश केशवानी, मेहुल सत्यवंशी, अरविंद चंद्रवंशी, विकाश चन्द्रवंशी, शिवेंद्र वर्मा,अमन वर्मा,राजा झारिया, कृष्ण नामदेव, आशीष साहू, वैभव ठाकुर सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

जितेन्द्र राज नामदेव

एडिटर इन चीफ - खबर योद्धा

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