फेडरेशन के विरोध के बाद भी कलेक्टर के अधिकार बरकरार, संशोधित आदेश जारी

फेडरेशन के विरोध के बाद भी कलेक्टर के अधिकार बरकरार, संशोधित आदेश जारी

रायपुर खबर योद्धा विद्या भूषण दुबे।। महिला एवं बाल विकास विभाग के पर्यवेक्षकों के सेक्टर परिवर्तन संबंधी 9 जून को जारी आदेश में संशोधन करते हुए मंत्रालय ने नया आदेश जारी कर दिया है। पूर्व आदेश में पर्यवेक्षकों के संदर्भ में प्रयुक्त आपत्तिजनक शब्दावली को लेकर कर्मचारी संगठनों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया था। फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा की आपत्ति के बाद शासन को आदेश की भाषा में संशोधन करना पड़ा। हालांकि, सेक्टर परिवर्तन का अधिकार कलेक्टर को देने का प्रावधान यथावत रखा गया है। इसके तहत कलेक्टर विकासखंड स्तर पर पर्यवेक्षकों का सेक्टर परिवर्तन करने के लिए अधिकृत बने रहेंगे।

इस आदेश को लेकर कर्मचारी संगठनों और पदाधिकारियों की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ संगठनों ने इसका स्वागत किया है, जबकि कुछ ने इसे कर्मचारियों के हितों के विपरीत बताया है।

छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा ने कहा कि आदेश की भाषा पर संगठन को गंभीर आपत्ति थी, जिसके संबंध में शासन को पत्राचार किया गया। उन्होंने कहा कि फेडरेशन इस आदेश को पूरी तरह न्यायसंगत नहीं मानता और इसके पुनर्विचार की अपेक्षा करता है।

वहीं लिपिक वर्ग कर्मचारी संघ के प्रांताध्यक्ष संजय सिंह ने कलेक्टर को सेक्टर परिवर्तन का अधिकार दिए जाने का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि जो पर्यवेक्षक लंबे समय से कार्यालयों में लिपिकीय कार्य कर रहे हैं, उन्हें भी उनके मूल पद पर वापस भेजने संबंधी निर्देश जारी किए जाने चाहिए।

छत्तीसगढ़ अधिकारी कर्मचारी संघ के प्रांताध्यक्ष करण सिंह अटेरिया ने भी आदेश का समर्थन करते हुए कहा कि जिस प्रकार पटवारियों का समय-समय पर स्थानांतरण किया जाता है, उसी प्रकार एक ही सेक्टर में वर्षों से कार्यरत पर्यवेक्षकों का भी परिवर्तन किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि इस मांग को लेकर प्रदेश के सभी कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपा जाएगा।

दूसरी ओर छत्तीसगढ़ राज्य कर्मचारी संघ के प्रांताध्यक्ष अश्विनी चेलक ने आदेश का विरोध करते हुए कहा कि कर्मचारियों की सहमति के बिना सेक्टर परिवर्तन करना अनुचित है। उन्होंने इसे शासन के तानाशाही रवैये का परिचायक बताते हुए कहा कि एक ओर कर्मचारियों के लंबित स्थानांतरण प्रकरणों का निराकरण नहीं हो रहा है, वहीं दूसरी ओर जबरन परिवर्तन किए जा रहे हैं।

रंजना ठाकुर ने भी आदेश के व्यावहारिक पक्ष पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिन विकासखंडों में दो परियोजनाएं संचालित हैं, वहां एक परियोजना से दूसरी परियोजना में परिवर्तन होने पर डीडीओ बदल जाएगा, जो वस्तुतः स्थानांतरण की स्थिति उत्पन्न करेगा। उनके अनुसार परियोजना के भीतर ही परिवर्तन किया जाना चाहिए और पर्याप्त कारण होने पर ही ऐसे निर्णय लिए जाने चाहिए।

इस विषय पर राज्य कर्मचारी संघ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत गौतम, प्रगतिशील पर्यवेक्षक संघ की प्रदेश अध्यक्ष मीणा राजवाड़े, पर्यवेक्षक कल्याण संघ रायपुर की जिला अध्यक्ष रेखा राजपूत तथा पर्यवेक्षक संघ की पूर्व प्रदेश सचिव याचना शुक्ला से भी प्रतिक्रिया मांगी गई थी, लेकिन कुछ पदाधिकारियों ने कोई जवाब नहीं दिया और कुछ ने प्रतिक्रिया देने से परहेज किया।

 

फिलहाल, कर्मचारी संगठनों के विरोध के बाद आदेश की भाषा में संशोधन तो कर दिया गया है, लेकिन पर्यवेक्षकों के सेक्टर परिवर्तन संबंधी कलेक्टर के अधिकार पूर्ववत बनाए रखे गए हैं। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि शासन इस व्यवस्था को लागू रखने के पक्ष में है, जबकि कर्मचारी संगठनों के बीच इस मुद्दे पर मतभेद जारी हैं।

जितेन्द्र राज नामदेव

एडिटर इन चीफ - खबर योद्धा

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