मुख्यमंत्री कन्यादान के नव विवाहित जोड़ों से 5-5 हज़ार मांगने का लगा आरोप

मुख्यमंत्री कन्यादान के नव विवाहित जोड़ों से 5-5 हज़ार मांगने का लगा आरोप

पर्यवेक्षक पर मुख्यमंत्री कन्यादान के नव विवाहित जोड़ों से 5-5 हज़ार मांगने और रेडी टू ईंट की 56 बोरी घर ले जाने का आरोप

विभागीय अधिकारियों के द्वारा मामले को दबाने का प्रयास

रायपुर खबर योद्धा विद्या भूषण दुबे।। स्थानीय कचना सेक्टर महिला एवं बाल विकास विभाग की पर्यवेक्षक स्नेहलता गौतम पर मुख्यमंत्री कन्यादान के विवाहित जोड़ों से प्रति जोड़ा पांच हजार रुपये मांगने और 28 आंगनबाड़ी केंद्रों से रेडी टू ईंट की 56 बोरी अपने घर ले जाने की लिखित शिकायत पखवाड़े भर पहले जिला कार्यक्रम अधिकारी और विधायक से की गई है।

रायपुर कचना सेक्टर की 56 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं के द्वारा अपने सेक्टर सुपरवाइजर स्नेहलता गौतम पर सुपोषण चौपाल का हिस्सा मांगने, यात्रा भत्ता के बिल पर 50 प्रतिशत कमीशन लेने, गर्म भोजन थाली में 25 प्रतिशत की रिश्वत मांगने जैसे बेहद संगीन आरोप लगाया गया है।

   इतना ही नहीं सेक्टर में संचालित 28 आंगनबाड़ी केंद्रों के प्रत्येक केंद्र से रेडी टू ईट की 2 -2 बोरी बलात अपने घर लेजाने की भी शिकायत की गई है। शिकायत यही नहीं रुकी है। इन 28 28 आंगनबाड़ी केंद्रों के प्रत्येक केंद्र से 2 -2 झाड़ू भी मांगे जाने की शिकायत की गई है। 

  लगभग 15-17 दिन पहले 8 मई को की गई लिखित शिकायत पर जिला कार्यक्रम अधिकारी शैल ठाकुर के द्वारा मामले को दबाने का पूरा प्रयास किया जा रहा है । दरअसल मुख्यमंत्री कन्यादान के विवाहित जोड़ों से प्रति जोड़ा पांच हजार रुपये मांगने और 28 आंगनबाड़ी केंद्रों से रेडी टू ईंट की 56 बोरी अपने घर ले जाने जैसी लिखित शिकायत कहीं न कहीं उनकी प्रशासनिक छवि को प्रभावित कर रही है। 

      इधर लिखित शिकायत के बाद भी जिला कार्यक्रम अधिकारी शैल ठाकुर के द्वारा पर्यवेक्षक के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं किए जाने पर छत्तीसगढ़ जुझारू आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका कल्याण संघ ने डीपीओ के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है। संघ की जिलाध्यक्ष श्रीमती भुवनेश्वरी तिवारी ने 15 दिवस के भीतर जिला कार्यालय का घेराव करने की लिखित चेतावनी दी है। संघ के द्वारा दिए गए चेतावनी के दस दिन बीत गए हैं । वहीं पर्यवेक्षक को परियोजना अधिकारी और जिला कार्यक्रम अधिकारी के द्वारा कारण बताओ नोटिस तक जारी नहीं किया जाना अनेक संदेहों को जन्म दे रहा है। क्या कमीशनखोरी में उपर तक की हिस्सेदारी है या फिर ऐसे कौन से कारण है जिसकी वजह से पर्यवेक्षक के विरुद्ध कार्यवाही करने से अधिकारी बच रहे हैं ? उल्लेखनीय है कि पर्यवेक्षक पहले भी संचालक के द्वारा निलंबित की जा चुकी है।

       पूरे मामले में संचालक, जिला कार्यक्रम अधिकारी रायपुर , परियोजना अधिकारी धरसींवा और संबंधित पर्यवेक्षक से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया जा रहा है।

जितेन्द्र राज नामदेव

एडिटर इन चीफ - खबर योद्धा

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