भोजशाला अब सरस्वती मंदिर इंदौर हाईकोर्ट का फैसला : विद्याभूषण दुबे की खास रिपोर्ट

भोजशाला अब सरस्वती मंदिर इंदौर हाईकोर्ट का फैसला : विद्याभूषण दुबे की खास रिपोर्ट

रायपुर खबर योद्धा विद्याभूषण दुबे ।।  मध्यप्रदेश के इंदौर हाईकोर्ट ने धार में स्थित भोजशाला विवाद मामले में फैसला सुनाते हुए भोजशाला को वाग्देवी (सरस्वती) मंदिर माना है. न्यायालय ने एएसआई का 2003 का उस आदेश को भी निरस्त कर दिया है, जिसमें एएसआई ने भोजशाला में हिंदूओं को पूजा का अधिकार नहीं दिया था ।

एमपी हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने अपने फैसले में यह माना कि विवादित स्थल का मूल धार्मिक स्वरूप ‘भोजशाला’ है और यहां मां सरस्वती का मंदिर मौजूद था. इसे मंदिर मानते हुए हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार दिया है।

   धार की ऐतिहासिक भोजशाला से संबंधित मां सरस्वती (वाग्देवी) की प्रतिमा वर्तमान में लंदन के ब्रिटिश संग्रहालय (British Museum) में मौजूद है। 19वीं सदी के अंत में ब्रिटिश अधिकारी मेजर किन्नैड इसे इंग्लैंड ले गए थे । फिलहाल, धार की भोजशाला में प्रतिमा की जगह एक प्रतीकात्मक तस्वीर या स्थान ही मौजूद है।

मध्य प्रदेश के इंदौर हाई कोर्ट ने धार की भोजशाला को मां सरस्वती का मंदिर माना है। अदालत ने भारत सरकार को लंदन से मां सरस्वती की प्रतिमा को वापस लाने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

इनके विचार

विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक कुमार ने धार की भोजशाला पर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (इंदौर पीठ) के 15 मई 2026 के फैसले का पुरजोर स्वागत किया है। उन्होंने इसे हिंदुओं की एक बड़ी जीत बताया है।

देवपुरी रायपुर के पंडित वेदव्यास मिश्रा का कहना है कि आज भोजशाला पर जो मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का निर्णय आया है उसे सुनकर सभी हिन्दूओं को इतना बड़ा उत्साह हुआ है जिसका ब्यान नहीं किया जा सकता लेकिन एक बात यह भी है कि कांग्रेसी हिन्दूओं को इसका दुःख है

जितेन्द्र राज नामदेव

एडिटर इन चीफ - खबर योद्धा

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