स्कूल सत्र 3 के माह बीत जाने के बाद अब मली छत के लिए 50 हजार की स्वीकृति

स्कूल सत्र 3 के माह बीत जाने के बाद अब मली छत के लिए 50 हजार की स्वीकृति

कवर्धा खबर योद्धा।। कबीरधाम जिले के बोड़ला विकासखंड अंतर्गत ग्राम सरई पतेरा की प्राथमिक शाला के जर्जर भवन की छत की मरम्मत के लिए आखिरकार 50 हजार रुपये की स्वीकृति मिल गई है। हालांकि, यह स्वीकृति स्कूल सत्र शुरू होने के करीब तीन महीने बाद मिली है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब बरसात के पूरे सीजन में स्कूली बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ा, तो मरम्मत कार्य के लिए समय रहते पहल क्यों नहीं की गई? अब बरसात का मौसम बीतने के बाद बच्चों को सुरक्षित छत मिलने की उम्मीद जगी है।

विकास कार्यों की पारदर्शिता भी जरूरी

जिले में विभिन्न विकास कार्यों की स्वीकृति, लागत, निर्माण की समय-सीमा और कार्य पूर्ण होने की स्थिति की जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होना भी जरूरी है। किंतु करोड़ों रुपए के कार्य प्रारंभ होने के बाद भी ठेकेदार कोई भी सूचना बोर्ड लगाना मुनाजीब नहीं समझता ,और इस तरह अनेकों निर्माण कार्य प्रारंभ है।

प्राथमिक शाला भवन की स्थिति जर्जर होने के कारण यहां कक्षाओं का संचालन फिलहाल बंद है। स्कूल में कुल 71 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जिनकी पढ़ाई वर्तमान में मिडिल स्कूल के बरामदे में कराई जा रही है। विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए मिडिल स्कूल में दो शिफ्ट में कक्षाएं संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, वैकल्पिक व्यवस्था के बीच बच्चों को किन परिस्थितियों में पढ़ाई करनी पड़ रही है, यह अपने आप में विचारणीय विषय है।

 तीन महीने बाद मरम्मत के लिए मिली राशि

विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, विकासखंड शिक्षा अधिकारी, बोड़ला की मांग के आधार पर वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्राथमिक शाला भवन की मरम्मत के लिए 50 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं। स्वीकृत राशि जिला पंचायत को भेज दी गई है, ताकि मरम्मत संबंधी आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

मिडिल स्कूल में कक्षों की सीमित उपलब्धता को देखते हुए प्राथमिक और मिडिल स्कूल के विद्यार्थियों की पढ़ाई सुचारू रूप से जारी रखने के लिए दो पालियों में कक्षाएं लगाने की व्यवस्था की गई है। विभाग का कहना है कि मरम्मत कार्य की प्रक्रिया के साथ-साथ बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए यह वैकल्पिक व्यवस्था बनाई गई है।

 क्या बरसात से पहले नहीं हो सकती थी पहल ?

स्कूल भवन की मरम्मत के लिए राशि की स्वीकृति मिलना निश्चित रूप से राहत की बात है, लेकिन सवाल यह है कि विद्यार्थियों को सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए समय रहते कदम क्यों नहीं उठाए गए। स्कूल सत्र शुरू होने के बाद बरसात के दौरान बच्चों को वैकल्पिक व्यवस्था में पढ़ाई करनी पड़ी और अब मौसम बीतने के बाद मरम्मत के लिए राशि स्वीकृत हुई है।

एक ओर बच्चों की सुरक्षा और बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं की बात की जाती है, वहीं दूसरी ओर जर्जर भवनों की मरम्मत में होने वाली देरी व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। ऐसे में जरूरी है कि मरम्मत कार्य जल्द पूरा किया जाए, ताकि विद्यार्थियों को सुरक्षित कक्षाएं मिल सकें और भविष्य में ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।

फिलहाल सरई पतेरा के 71 विद्यार्थियों को अपनी कक्षाओं के लिए सुरक्षित भवन मिलने का इंतजार है। अब देखना होगा कि 50 हजार रुपये की स्वीकृत राशि से मरम्मत कार्य कब शुरू होता है और बच्चों को जर्जर भवन तथा अस्थायी व्यवस्था से कब राहत मिलती है।

जितेन्द्र राज नामदेव

एडिटर इन चीफ - खबर योद्धा

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