विधानसभा में पंडरिया विधायक भावना बोहरा ने वनांचल क्षेत्र में विद्युत् आपूर्ति, श्रमिकों की सुविधा और राजस्व के लंबित प्रकरणों के विषय में किया प्रश्न

विधानसभा में पंडरिया विधायक भावना बोहरा ने वनांचल क्षेत्र में विद्युत् आपूर्ति, श्रमिकों की सुविधा और राजस्व के लंबित प्रकरणों के विषय में किया प्रश्न

 

कवर्धा खबर योद्धा।। 13 जुलाई से 17 जुलाई तक छत्तीसगढ़ विधानसभा मानसून सत्र के प्रथम दिन पंडरिया विधायक भावना बोहरा ने पंडरिया विधानसभा एवं जनहित से जुड़े विषयों पर प्रश्न किया। इस दौरान विधायक भावना बोहरा ने पंडरिया विधानसभा क्षेत्र के वनांचल एवं आदिवासी बहुल ग्राम पंचायतों में विद्युत् आपूर्ति, वर्तमान में रजिस्ट्री में स्वतः नामांतरण की प्रक्रिया, कबीरधाम जिले में वर्तमान में भू-राजस्व के लंबित प्रकरणों तथा वन सुरक्षा समिति, लघु वनोपज एवं तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य से जुड़े श्रमिकों व संग्राहकों की दी जाने वाली सुविधाओं के विषय में प्रश्न किया।

भावना बोहरा ने प्रश्न किया कि पंडरिया विधानसभा क्षेत्र के वनांचल एवं आदिवासी बहुल ग्राम पंचायत तेलियापानी, बिरहुलडीह, कांदावाणी, छीरपानी, रूख्मीदादर, छिंदीडीह एवं अमनिया के 20 से अधिक ग्राम जून, 2026 की स्थिति में भी नियमित विद्युत सुविधा से वंचित हैं अथवा अत्यंत सीमित विद्युत व्यवस्था पर निर्भर हैं, जिसके कारण हजारों ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं? उक्त ग्रामों में वर्तमान में कितने घर/परिवार पूर्णतः विद्युत सुविधा से वंचित हैं तथा कितने परिवार केवल सौर ऊर्जा आधारित अस्थायी व्यवस्था पर निर्भर हैं? ग्रामवार एवं पंचायतवार विवरण क्या है ? क्या शासन द्वारा इन क्षेत्रों में सौर ऊर्जा आधारित व्यवस्था (सोलर बैटरी / सोलर होम लाइटिंग सिस्टम) उपलब्ध कराई गई है? यदि हाँ तो, उक्त व्यवस्था स्थानीय आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु पर्याप्त सिद्ध हो रही है या नहीं, इसकी निगरानी एवं रखरखाव हेतु विभाग द्वारा क्या व्यवस्था की गई है ? क्या शासन द्वारा इन ग्रामों को मुख्य विद्युत ग्रिड से जोड़ने, नवीन विद्युत लाइन विस्तार, ट्रांसफार्मर स्थापना एवं शत-प्रतिशत घरेलू विद्युतीकरण हेतु कोई विशेष कार्ययोजना तैयार की गई है? यदि हाँ, तो ग्रामवार स्वीकृत कार्य, स्वीकृत राशि, एजेंसी एवं पूर्णता अवधि क्या है? माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी ने लिखित उत्तर में बताया कि पंडरिया विधानसभा क्षेत्र के वनांचल एवं आदिवासी बहुल प्रश्नाधीन 06 ग्राम पंचायतों के 20 ग्रामों में से जून-2026 की स्थिति में 08 ग्राम परंपरागत विद्युत से अविद्युतीकृत हैं। उक्त क्षेत्र में वर्तमान में 71 घर / परिवार पूर्णतः विद्युत सुविधा से वंचित हैं तथा 1127 परिवार केवल सौर ऊर्जा आधारित व्यवस्था पर निर्भर हैं। प्रश्नाधीन क्षेत्रों के उपरोक्त ग्रामों में शासन द्वारा सौर ऊर्जा आधारित विद्युतीकरण की व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है। उक्त व्यवस्था से ग्रामीणों हेतु रात्रिकालीन प्रकाश व्यवस्था, मोबाईल चार्जिंग इत्यादि मूलभूत सुविधाएँ सुनिश्चित होती हैं। उक्त सौर संयंत्रों की निगरानी स्थानीय ग्रामीणों द्वारा की जाती है। सोलर पावर प्लांटों का रखरखाव का कार्य पाँच वर्ष की वारंटी अवधि तक संबंधित स्थापनाकर्ता इकाई तत्पश्चात् क्रेडा द्वारा किया जाता है तथा सोलर होमलाईटों का रखरखाव का कार्य पाँच वर्ष की वारंटी अवधि तक संबंधित स्थापनाकर्ता इकाई द्वारा नियमानुसार किया जाता है। उल्लेखित ऐसे ग्राम जो कि परंपरागत तरीके से विद्युतीकृत नहीं हैं. सघन वन क्षेत्र होने के कारण वर्तमान में परंपरागत विद्युतीकरण हेतु किसी भी कार्ययोजना में शामिल नहीं है।

 

भावना बोहरा ने प्रश्न किया कि क्या वर्तमान में रजिस्ट्री में स्वतः नामांतरण की प्रक्रिया चल रही है? क्या पटवारी एवं तहसीलदार को अपनी भुइयाँ आईडी में स्वतः नामांतरण से दर्ज हुए सभी प्रकरण नामांतरण पंजी में प्रदर्शित होते हैं? यदि नहीं, तो इसके कारण क्या हैं एवं यह बताएं कि इस स्थिति में पटवारी मैनुअल अभिलेखों को किस प्रकार दुरुस्त करेगा / अद्यतित रखेगा? क्या स्वतः नामांतरण प्रणाली में तकनीकी त्रुटि, डेटा सिंक्रोनाइजेशन में विलंब, लॉग-इन एक्सेस अथवा अन्य संचालन संबंधी समस्याओं की शिकायतें प्राप्त हुई हैं? यदि हाँ, तो दिनांक 01 मार्च, 2024 से 31 मार्च, 2026 तक प्राप्त शिकायतों की संख्या, उनकी प्रकृति एवं निराकरण की वर्तमान स्थिति की जानकारी देवें ? स्वतः नामांतरण प्रणाली एवं मैनुअल राजस्व अभिलेखों के मध्य किसी प्रकार की विसंगति अथवा त्रुटि पाए जाने पर उसके सुधार हेतु निर्धारित मानक प्रक्रिया (SOP), उत्तरदायी अधिकारी तथा निराकरण की समय-सीमा क्या है? जिसके लिखित उत्तर में राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा जी ने बताया कि वर्तमान में विक्रय विलेखों के रजिस्ट्री से संबंधित प्रकरणों में स्वतः नामांतरण की प्रक्रिया चल रही है। पटवारी एवं तहसीलदार को भुइयां आईडी में स्वतः नामांतरण से दर्ज हुए सभी प्रकरण भूईयां पोर्टल में प्रदर्शित किए जाने हेतु आवश्यक तकनीकी प्रावधान किये जाने की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। पटवारी के द्वारा भू-नक्शा मे आवेदक द्वारा प्रस्तुत पंजीकृत बैनामा के आधार पर जांच उपरांत अद्यतन किया जाता है। शेष भू-अभिलेख ऑनलाईन होने के कारण मैनुअल अभिलेखों को दुरुस्त करने की आवश्यकता नहीं है। स्वतः नामांतरण प्रणाली में तकनीकी त्रुटि, डेटा सिंक्रोनाजेशन में विलंब, लॉग इन एक्सेस अथवा अन्य संचालन संबंधी समस्याओं की दिनांक 01 मार्च, 2024 से 31 मार्च, 2026 तक की अवधि में कुल 09 (जिला दुर्ग में 7 एवं महासमुन्द में 02) शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनमें नाम सुधार, खसरा एवं रकबा सुधार संबंधी तकनीकी समस्या थी, सभी का निराकरण हो चुका है। वर्तमान में भू-अभिलेख यथा खसरा, बी-1 एवं भू-नक्शा ऑनलाईन संधारित हैं। स्वतः नामांतरण के प्रकरणों में त्रुटि होने की स्थिति में छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 में त्रुटि सुधार के प्रावधान अनुसार सक्षम राजस्व अधिकारी द्वारा प्रकरण दर्ज कर सुधार की कार्यवाही निर्धारित समय-सीमा में किया जाता है।

 

कबीरधाम जिला अंतर्गत राजस्व से जुड़े लंबित प्रकरणों के विषय में प्रश्न करते हुए भावना बोहरा ने पूछा कि कबीरधाम जिले में वर्तमान में भू-राजस्व संहिता की धारा 115 (त्रुटि सुधार) के अंतर्गत कुल कितने प्रकरण लंबित हैं? तहसीलवार जानकारी प्रदान करें ? लम्बित प्रकरणों के निराकरण में हो रहे विलंब के मुख्य कारण क्या हैं? इन लंबित प्रकरणों के त्वरित निराकरण हेतु विभाग द्वारा क्या प्रयास किये जा रहे हैं? क्या उक्त प्रकरणों के निराकरण हेतु कोई समय सीमा निर्धारित की गई है? भू-राजस्व संहिता की धारा 115 (त्रुटि सुधार) की प्रक्रिया अंतर्गत नोटिस सुपुर्द न होने, पटवारी प्रतिवेदन में देरी एवं भुईयां पोर्टल की तकनीकी खामियां आदि प्रक्रियागत समस्याओं को दूर कर प्रकरणों के त्वरित निराकरण हेतु विभाग द्वारा क्या प्रयास किये जा रहे हैं ? जिसके लिखित उत्तर में राजस्व मंत्री जी ने बताया कि कबीरधाम जिले में वर्तमान में छत्तीसगढ़ भू-राजस्व सहिता की धारा 115 (त्रुटि सुधार) के अन्तर्गत कुल 372 प्रकरण (मूल एवं अपील प्रकरण) लंबित है। प्रकरणों के लंबित होने का कारण पक्षकारो की अनुपस्थिति, साक्ष्य प्रस्तुत करने में विलंब है। लंबित प्रकरणो के शीघ्र निराकरण हेतु राजस्व शिविर एवं ई-कोर्ट के माध्यम से कार्यवाही किया जा रहा है। उक्त प्रकरणो के निराकरण के लिए समय-सीमा 45 कार्य दिवस है। नोटिस की समय पर तामिली के लिए माल जमादार एवं ग्राम कोटवारो को निर्देर्शित किया गया है और लंबित राजस्व प्रकरणों के निराकरण हेतु नियमित रूप से समीक्षा की जाती है।

 

विधायक भावना बोहरा ने वन सुरक्षा समिति, लघु वनोपज एवं तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य से जुड़े श्रमिकों एवं संग्राहकों की सुविधा के विषय में प्रश्न किया कि वन विभाग के अंतर्गत वन सुरक्षा समितियों, लघु वनोपज एवं तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य में संलग्न मजदूरों, संग्राहकों एवं समिति सदस्यों के लिए पारिश्रमिक राशि के अतिरिक्त विभाग अथवा संबंधित समितियों के माध्यम से कौन-कौन सी सुविधाएँ, प्रोत्साहन राशि, बीमा, सामाजिक सुरक्षा, छात्रवृत्ति, स्वास्थ्य, आवास अथवा अन्य कल्याणकारी लाभ प्रदान किए जाने का प्रावधान है? लाभवार एवं योजनावार जानकारी देवें ? जिला कबीरधाम अंतर्गत दिनांक 01 मार्च, 2024 से 31 मार्च, 2026 की अवधि में उक्त कार्यों से जुड़े मजदूरों, संग्राहकों एवं समिति सदस्यों को कौन-कौन से लाभ प्रदान किए गए हैं? जिसके लिखित उत्तर में वन मंत्री श्री केदार कश्यप जी ने बताया कि वन विभाग के अंतर्गत् लघु वनोपज एवं तेन्दूपत्ता संग्रहण कार्य में संलग्न श्रमिकों, संग्राहकों एवं समिति सदस्यों के लिए पारिश्रमिक राशि के अतिरिक्त विभाग अथवा संबंधित समितियों के माध्यम से देय सुविधाएं प्रोत्साहन राशि, बीमा, सामाजिक सुरक्षा एवं उनके बच्चों को छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है।

जितेन्द्र राज नामदेव

एडिटर इन चीफ - खबर योद्धा

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