जिला अस्पताल कवर्धा में तीन जटिल स्त्री रोग शल्यक्रियाएं सफल, गंभीर एनीमिया से पीड़ित महिलाओं का सफल उपचार
कवर्धा खबर योद्धा।। जिला अस्पताल कवर्धा के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग ने तीन गंभीर स्त्री रोग से पीड़ित महिलाओं की सफल शल्यक्रिया कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। अत्यधिक मासिक धर्म (Heavy Menstrual Bleeding/AUB) के कारण तीनों मरीज गंभीर एनीमिया से पीड़ित थीं तथा ऑपरेशन से पूर्व रक्त चढ़ाने की आवश्यकता पड़ी।

पहला मामला 45 वर्षीय महिला का था, जो पिछले छह माह से अत्यधिक मासिक धर्म के कारण गंभीर रक्ताल्पता (Severe Anemia) से पीड़ित थी। भर्ती के दौरान मरीज को तीन यूनिट रक्त चढ़ाया गया। जांच में एंडोमेट्रियल हाइपरप्लासिया की पुष्टि हुई। मरीज का सफल ऑपरेशन डॉ. निहारिका सिंह द्वारा किया गया।

दूसरा मामला 50 वर्षीय महिला का था, जो अत्यधिक मासिक धर्म के कारण गंभीर एनीमिया से ग्रसित थी। मरीज को भर्ती कर तीन यूनिट रक्त चढ़ाया गया। जांच में गर्भाशय में लगभग 20 सेंटीमीटर आकार एवं 1.2 किलोग्राम वजन की विशाल रसौली (Leiomyoma) पाई गई। इस जटिल शल्यक्रिया को डॉ. मंजूषा यादव ने सफलतापूर्वक संपन्न किया।
तीसरा मामला 50 वर्षीय महिला का था, जो पिछले एक वर्ष से अत्यधिक मासिक धर्म, पेट में बढ़ती गांठ (Mass Abdomen) एवं गंभीर एनीमिया से परेशान थी। भर्ती के पश्चात रक्त चढ़ाया गया। जांच में Leiomyoma एवं Adenomyosis की पुष्टि हुई, जिसके बाद डॉ. निहारिका सिंह द्वारा सफलतापूर्वक हिस्टेरेक्टॉमी (Hysterectomy) की गई।
वर्तमान में तीनों मरीजों की शल्यक्रियाएं सफल रही हैं तथा उन्हें चिकित्सकीय निगरानी में अस्पताल में भर्ती रखकर आवश्यक उपचार एवं देखभाल दी जा रही है। सभी मरीजों की स्थिति संतोषजनक एवं स्थिर है।
इन सफल शल्यक्रियाओं में स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. मुकेश वालेचा तथा ऑपरेशन थिएटर (OT) स्टाफ की समन्वित एवं महत्वपूर्ण भूमिका रही।
चिकित्सकों ने महिलाओं से अपील की है कि यदि मासिक धर्म सामान्य से अधिक हो, लंबे समय तक रक्तस्राव बना रहे, अत्यधिक कमजोरी, चक्कर आना, हीमोग्लोबिन की कमी या पेट में गांठ जैसी समस्या महसूस हो तो इसे सामान्य मानकर अनदेखा न करें। समय पर स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श एवं नियमित जांच से एंडोमेट्रियल हाइपरप्लासिया, गर्भाशय की रसौली (Leiomyoma) तथा Adenomyosis जैसी बीमारियों का शीघ्र निदान एवं उपचार संभव है, जिससे गंभीर एनीमिया एवं अन्य जटिलताओं से बचा जा सकता है।



