मबाविवि के पर्यवेक्षकों ने किया ऑनलाइन रिपोर्टिंग का बहिष्कार क्या नर्स, लिपिक और स्वास्थ्य कर्मियों की तरह मबाविवि के पर्यवेक्षक भी ठगे जाएंगे ?

मबाविवि के पर्यवेक्षकों ने किया ऑनलाइन रिपोर्टिंग का बहिष्कार
क्या नर्स, लिपिक और स्वास्थ्य कर्मियों की तरह मबाविवि के पर्यवेक्षक भी ठगे जाएंगे ?
रायपुर खबर योद्धा विद्या भूषण दुबे।। प्रदेश के पटवारी ने जिस तरह से अपनी मांगों को पूरी करने के लिए ड्यूटी में रहते हुए ऑनलाइन रिपोर्टिंग का बहिष्कार किया था . अब इसी तर्ज पर महिला एवं बाल विकास विभाग के पर्यवेक्षकों ने भी वेतन विसंगति दूर करने की मांग को लेकर कार्य स्थल पर उपस्थित रहते हुए ऑनलाइन संबंधित समस्त कार्यों का बहिष्कार प्रारंभ कर दिया है।
एक अनुमान के अनुसार प्रदेश में इन दिनों लगभग 1866 पर्यवेक्षक कार्यरत हैं। अपनी मांग के संबंध में पर्यवेक्षकों का कहना है कि अन्य विभागों में यह पद 4200 ग्रेड पे पर लेवल 8 में है किंतु महिला बाल विकास में 2400 ग्रेड पे पर लेवल 6 में है. बताते चलें कि शासन के नियमों के अनुसार पर्यवेक्षक का पद तृतीय श्रेणी कार्यपालिक का पद है.
इनका कहना है कि सुपरवाइजर सेवानिवृत्त होते जा रही हैं, कई बार सरकार भी बदल चुकी है बावजूद इसके महिला बाल विकास विभाग में कार्यरत सुपरवाइजरो की वेतन विसंगति दूर नहीं हुई है. वहीं शासन के एक उच्चाधिकारी का कहना था कि वेतन विसंगति दूर करने की मांग और अधिक वेतन व वेतन भत्ता मांग में अंतर है।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2018 में स्वास्थ्य विभाग की तात्कालिक डायरेक्टर रानू साहू IAS के द्वारा 23 केडर की वेतन विसंगति दूर करने संबंधित प्रस्ताव शासन को भेजा गया था जो अभी तक पूरी नहीं की गई है। इसी तरह से लिपिक वर्ग के लोग भी वेतन विसंगति की मांग को लेकर समय-समय पर आंदोलन करते रहते हैं । बिलासपुर की एक सभा में और छत्तीसगढ़ के विधानसभा में लिपिक की वेतन विसंगति दूर करने की घोषणा मुख्यमंत्री के द्वारा की गई थी परंतु आज दिनांक तक लिपिक की वेतन विसंगति की समस्या यथावत बनी हुई है।
वेतन विसंगति को लेकर के स्वास्थ्य विभाग के नर्स स्टाफ लोग भी एक बहुत बड़ा आंदोलन किए थे। नर्सिंग स्टाफ के आंदोलन में चले जाने के कारण प्रदेश भर के अस्पतालों में त्राहि त्राहिमाम मच गया था। स्थिति को भांपते हुए शासन के द्वारा हड़ताली नसों को सेंट्रल जेल में बंद कर दिया गया था।
बताया जाता है कि हड़ताली नसों और शासन के बीच में एक समझौता हुआ था। जिसके तहत 3 महीने के अंदर वेतन विसंगति दूर किए जाने की बात कही गई थी। इस संबंध में फाइल भी चली थी परंतु लगभग 5 वर्ष बीत जाने के बाद भी नर्सिंग स्टाफ के लोग अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं । नर्सो की वेतन विसंगति संबंधित फाइल मंत्रालय में कहीं धूल खा रही है।