गिट्टी खदानों के धमाकों से दहशत में लोहारा, ग्रामीणों का प्रशासन पर फूटा गुस्सा, लगातार गिरता जा रहा जल स्तर

गिट्टी खदानों के धमाकों से दहशत में लोहारा, ग्रामीणों का प्रशासन पर फूटा गुस्सा, लगातार गिरता जा रहा जल स्तर
कवर्धा खबर योद्धा ।। लोहारा विकासखंड में चूना पत्थर की गिट्टी खदानों की अवैध ब्लास्टिंग ने ग्रामीणों के जीवन को संकट में डाल दिया है। पेयजल संकट, फसलें बर्बाद होने का खतरा और स्कूल भवनों में दरारें पड़ने जैसी समस्याओं से त्रस्त ग्रामीणों का गुस्सा आखिरकार बुधवार को जिला मुख्यालय में फूट पड़ा। सैकड़ों ग्रामीण हाथों में पोस्टर और बैनर लेकर प्रदर्शन करने पहुंचे और कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर खदानों को तत्काल बंद करने की मांग की।
अवैध ब्लास्टिंग से बढ़ रही समस्याएं
ग्रामीणों का कहना है कि पहले खदान संचालकों द्वारा नियमानुसार सतही ब्लास्टिंग की जाती थी, जिससे सीमित प्रभाव पड़ता था। लेकिन अब अवैध रूप से 20 से 30 फीट गहराई में भारी विस्फोट किए जा रहे हैं। इससे न केवल भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है, बल्कि बोरवेल और हैंडपंप भी सूखने की कगार पर पहुंच गए हैं। पेयजल की समस्या विकराल रूप ले रही है। पहले जहां बोरवेल से आसानी से पानी निकलता था, अब सूखे कुएं और बंद हैंडपंप ग्रामीणों की प्यास नहीं बुझा पा रहे हैं।
स्कूल भवनों पर मंडरा रहा खतरा
गिट्टी खदानों के विस्फोटों का प्रभाव स्कूल भवनों पर भी साफ देखा जा सकता है। लोहारा में स्थित एक स्कूल जो महज 100 मीटर की दूरी पर स्थित है, उसकी दीवारों में गहरी दरारें पड़ चुकी हैं। स्कूल भवन की छत भी जर्जर हो गई है, जिससे हर वक्त हादसे का डर बना रहता है। हम अपने बच्चों को स्कूल भेजने से डरते हैं। हर ब्लास्टिंग के बाद ऐसा लगता है कि दीवारें गिर जाएंगी।
फसलें और स्वास्थ्य पर भी असर
ग्रामीणों ने बताया कि ब्लास्टिंग के बाद उड़ने वाली धूल और डस्ट ने आसपास की फसलों को बुरी तरह प्रभावित किया है। फसलें मुरझा रही हैं और उपज में भारी गिरावट आई है। वायु प्रदूषण के कारण सांस संबंधी बीमारियां भी तेजी से फैल रही हैं। खेतों में मेहनत करने के बाद भी फसलें बर्बाद हो रही हैं। दमा और खांसी के मरीजों की संख्या बढ़ रही है।
प्रशासन पर कार्रवाई न करने का आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। खदान संचालक नियमों को ताक पर रखकर मनमाने ढंग से विस्फोट कर रहे हैं। प्रशासन की निष्क्रियता से ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। हमारी मांग है कि इन अवैध खदानों को तुरंत बंद किया जाए और गांववासियों को इस भयावह स्थिति से राहत दी जाए।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
1. सभी अवैध खदानों को तत्काल बंद किया जाए।
2. अवैध ब्लास्टिंग करने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो।
3. प्रभावित स्कूल भवनों की मरम्मत और मजबूती की जाए।
4. पेयजल संकट से निपटने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।
5. प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए।
आंदोलन को तेज करने की चेतावनी
ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा कि अगर प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की तो वे आंदोलन को और उग्र करेंगे। उनका कहना है कि गांव की सुरक्षा और भविष्य के लिए वे किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।।