मध्यान्ह भोजन रसोईया आंदोलन में हुई मौतों पर भड़के कमल दास मुरचले, प्रशासनिक लापरवाही का लगाया आरोप

कवर्धा खबर योद्धा।। संयुक्त प्रधान पाठक कल्याण संघ छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष कमल दास मुरचले ने मध्यान्ह भोजन रसोईया संघ के अनिश्चितकालीन आंदोलन के दौरान दो रसोईया बहनों की हुई मौत को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों पर सीधा निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है और राज्य की प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है।

कमल दास मुरचले ने बयान में कहा कि शासन और संगठनों के बीच समन्वय की मुख्य कड़ी प्रशासनिक अधिकारी होते हैं, लेकिन जब यही अधिकारी लापरवाह और गैर-जिम्मेदाराना रवैया अपनाते हैं, तो ऐसे भयावह घटनाक्रम होना तय है। आंदोलन के दौरान दो हड़ताली रसोईया बहनों की मौत इसी प्रशासनिक उदासीनता का परिणाम है।

उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सरकार द्वारा कराई जाए और जो भी अधिकारी शासन की छवि धूमिल करने के लिए जिम्मेदार हैं, उन्हें चिन्हित कर कड़ी सजा दी जाए। साथ ही मृत रसोईया बहनों के परिजनों को शासकीय नौकरी एवं 50 लाख रुपये का मुआवजा प्रदान करने की मांग की गई।

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि आंदोलन के दौरान यदि कोई भी घटना घटती है, तो पीड़ितों को संवैधानिक रूप से उपचार का अधिकार है। इलाज में हुई देरी और शासन-प्रशासन द्वारा मामले को गंभीरता से नहीं लेने के कारण ही दो रसोईया बहनों की जान चली गई।

संयुक्त प्रधान पाठक कल्याण संघ की ओर से मृत रसोईया बहनों को सादर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्होंने मांग की कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और पीड़ित परिवारों को उचित न्याय मिले। उन्होंने यह भी कहा कि मध्यान्ह भोजन रसोईया संघ की मांगें पूरी तरह जायज हैं और उनका संगठन पहले ही शासन-प्रशासन का ध्यान इस ओर आकर्षित कर चुका है।

