डर से विकास तक का सफर… 6 मुठभेड़, 13 सरेंडर के बाद कबीरधाम हुआ नक्सल मुक्त
आजादी के दशकों बाद 2019 में लहराया तिरंगा, बंदूक से कलम तक बदलता कबीरधाम
कवर्धा खबर योद्धा।। छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले के दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में आजादी के बाद भी वर्षों तक तिरंगा नहीं लहराया जा सका था। नक्सलवाद के प्रभाव के चलते सूरुतिया, झूमा और झुरगीदादर जैसे इलाकों में भय और असुरक्षा का माहौल बना रहा। लेकिन वर्ष 2019 एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हुआ, जब इन क्षेत्रों में पहली बार शान से तिरंगा फहराया गया और विकास की नई शुरुआत हुई। और इस तरह वर्षों से नक्सल का दंश झेल रहे कबीरधाम जिले को वर्ष 2025 में मुक्ति मिली । ओर आत्मसमर्पण किए 8 से अधिक नक्सलियों को नौकरी मिला ।

कभी डर और सन्नाटे की पहचान रहे कबीरधाम जिले के वनांचल इलाकों में अब बदलाव की नई कहानी लिखी जा रही है। वर्ष 2010 के बाद नक्सल प्रभाव की चपेट में आए सूरुतिया, झूमाछापर और झुरगीदादर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों ने 2025 में एक ऐतिहासिक मोड़ देखा, जब जिला नक्सल प्रभावित सूची से बाहर हो गया। यह केवल प्रशासनिक उपलब्धि नहीं, बल्कि वर्षों की रणनीति, संघर्ष और जनविश्वास का परिणाम है। 2023-24 में प्रदेश में नई सरकार बनने के बाद नक्सल मुक्त छत्तीसगढ़ का लक्ष्य लेकर विशेष अभियान शुरू किया गया, जिसने इस बदलाव को निर्णायक दिशा दी।

इन इलाकों में एक समय ऐसा भी था, जब तिरंगा फहराना तक चुनौती माना जाता था। लोग भय के साए में जीवन जीते थे और विकास की कल्पना भी दूर की बात थी। लेकिन जब पहली बार इन क्षेत्रों में तिरंगा लहराया गया, तो वह केवल प्रतीक नहीं, बल्कि बदलाव की शुरुआत बन गया। इसके बाद लगातार सुरक्षा, विकास और संवाद के जरिए हालात बदलते गए और अब यह क्षेत्र शांति की राह पर आगे बढ़ चुका है।

मुठभेड़ों और आत्मसमर्पण से टूटा नेटवर्क
नक्सल गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए लगातार अभियान चलाए गए। बीते वर्षों में 6 बड़ी मुठभेड़ों में 3 नक्सलियों को मार गिराया गया, जिनमें महिला नक्सली भी शामिल थीं। वहीं 13 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा को अपनाया, जिनमें 6 महिलाएं और 7 पुरुष शामिल हैं। यह बदलाव इस बात का संकेत है कि अब बंदूक की जगह विश्वास और विकास ने ले ली है।
बंदूक से कलम तक का सफर
जहां कभी शिक्षा का अभाव था, वहां अब विद्यार्थी स्कूलों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे हैं। दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा के विस्तार के लिए विशेष प्रयास किए गए हैं। आज सैकड़ों विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं और कई युवा रोजगार से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रहे हैं।
विकास और विश्वास ने बदली तस्वीर
सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसे बुनियादी क्षेत्रों में तेजी से हुए कार्यों ने वनांचल की तस्वीर बदल दी है। अब गांवों में भय का माहौल नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और उम्मीद का वातावरण दिखाई देता है। लोग योजनाओं का लाभ ले रहे हैं और मुख्यधारा से जुड़कर अपने जीवन को बेहतर बना रहे हैं।
नेतृत्व और जमीनी सक्रियता से मिला परिणाम
इस बदलाव के पीछे मजबूत नेतृत्व और सतत प्रयासों की अहम भूमिका रही है। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों का लगातार दौरा कर न केवल सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया, बल्कि स्थानीय लोगों के बीच विश्वास भी कायम किया। संवाद, विकास और सख्ती के संतुलन ने इस अभियान को सफल बनाया।
आज कबीरधाम का वनांचल क्षेत्र यह संदेश दे रहा है कि जब संकल्प मजबूत हो, तो सबसे कठिन हालात भी बदले जा सकते हैं। बंदूक के साए से निकलकर अब यह क्षेत्र विकास, शिक्षा और आत्मनिर्भरता की नई पहचान बन चुका है।
