कबीरधाम जिले में 24 हजार से ज्यादा बोर खनन कही ना दे जल संकट को जन्म

जिले में 24 हजार से अधिक बोर खनन, जल संकट का बना खतरा 

कवर्धा खबर योद्धा।। जिले में लगातार बढ़ते बोर खनन ने भूजल स्तर को खतरनाक स्तर तक गिरा दिया है। जिले में अब तक 24 हजार से अधिक बोर खनन हो चुके हैं, लेकिन इस पर कोई ठोस नियंत्रण नहीं लगाया गया है। प्रशासनिक नियमों की अनदेखी और अनियंत्रित बोरिंग के कारण जिले के कई हिस्सों में पानी 125 फीट से भी नीचे गिर गया है, जिससे पीने और सिंचाई के लिए पानी मिलना मुश्किल दिक्कतों भरा होगा। अगर जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो भविष्य में जिले को भीषण जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।

 साल दर साल भू-जल स्तर तेजी से नीचे 

 

शासन से छूट मिलते ही गांव से लेकर शहर और खेतों से लेकर बाड़ी तक धड़ल्ले से बोर खनन किया जा रहा है। हर तरफ से धरती का सीना छलनी हो रहा है और अनियंत्रित खनन के कारण भूजल स्तर लगातार गिरता जा रहा है। बोरिंग करने के बावजूद कई जगहों पर पानी नहीं मिल रहा है, जिससे जल संकट गहराता जा रहा है। प्रशासन इस समस्या को नजरअंदाज कर रहा है और मनमानी तरीके से बोर खनन किया जा रहा है, जिसके कारण भविष्य में पानी की विकट समस्या पैदा हो सकती है।

 

गन्ना की फसल पर अत्यधिक पानी की खपत

 

भूजल स्तर गिरने का एक प्रमुख कारण गन्ना उत्पादन की अत्यधिक बढ़ती मात्रा भी है। गन्ने की खेती के लिए अधिक पानी की आवश्यकता होती है और जिले में बड़े पैमाने पर गन्ने की खेती होने से पानी की खपत कई गुना बढ़ गई है। एक सीजन में गन्ने की फसल को 20 से 21 बार सिंचाई की जरूरत पड़ती है, जिससे जलस्तर लगातार गिरता जा रहा है। बीते कई वर्षो में भूजल स्तर पहले ही तेजी से नीचे जा चुका है और गन्ने की फसल के कारण पानी का अत्यधिक दोहन हो रहा है।

 

शहर की स्थिति न बने चिंताजनक

 

शहर में पानी की उपलब्धता को लेकर स्थिति बेहद चिंताजनक होती जा रही है। कुछ साल पहले जहां 40-50 फीट की गहराई पर पानी मिल जाता था, अब कई इलाकों में 125-130 फीट से अधिक तक खुदाई करनी पड़ रही है। नई बस्तियों में बोरिंग करने के बाद भी कई जगहों पर पानी नहीं मिल रहा है

 

हर ब्लॉक की स्थिति पर बना रहा संकट

सहसपुर लोहरा, बोड़ला, पंडरिया और कवर्धा विकासखंड के हालात बेहद खराब हो चुके हैं। जिले के सभी ब्लॉकों में भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है और गर्मियों में जलस्तर 10-15 फीट तक और नीचे जाने की आशंका है। कई गांवों में जहां पहले 50 फीट पर पानी मिल जाता था, अब 150-200 फीट तक खुदाई करनी पड़ रही है, फिर भी पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा। पारंपरिक जल स्रोत जैसे कुएं और तालाब भी सूखते जा रहे हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों में पानी की समस्या और गंभीर हो गई है।

 

क्या हो सकता है इसका समाधान

 

अत्यधिक बोर खनन और जल दोहन को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। बिना अनुमति बोरिंग पर सख्त प्रतिबंध लगाना होगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी होगी। गन्ने जैसी अधिक पानी खपत करने वाली फसलों को नियंत्रित कर कम पानी की जरूरत वाली फसलों की खेती को बढ़ावा देना जरूरी है। हर घर, स्कूल और फैक्ट्री में वाटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य करना होगा और तालाबों तथा पारंपरिक जल स्रोतों को संरक्षित करने के लिए ठोस योजनाएं बनानी होंगी। प्रशासन को नई जल संरक्षण योजनाओं को तेजी से लागू करना होगा ताकि बारिश के पानी का अधिकतम उपयोग हो सके और जिले में जल संकट से निपटा जा सके।

अगर अब नहीं संभले तो हो न जाए देर

 किसान और आम जनता ने अभी भी जल संरक्षण की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए तो आने वाले वर्षों में कवर्धा जिले में जल संकट विकराल रूप धारण कर सकता है। बेतहाशा बोर खनन और जल दोहन की यह स्थिति न सिर्फ किसानों के लिए नहीं बल्कि सब के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।।

जितेन्द्र राज नामदेव

एडिटर इन चीफ - खबर योद्धा

 
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