स्वास्थ्य विभाग में शासन के आदेशों की उड़ रही धज्जियां
जन प्रतिनिधि उच्चाधिकारियों कर्मचारी संघों की खामोशी
खास खबर
ख़बरयोद्धा विद्या भूषण दुबे रायपुर।। कवर्धा स्वास्थ्य विभाग का मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय इन दिनों अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर किये जा रहे आदेशों के कारण चर्चा का विषय बना हुआ है । बताया जाता है कि विगत लगभग डेढ़ वर्षो में 100 से अधिक कर्मचारियों अधिकारियों को इधर-उधर संलग्न किया गया है।

यह कहने में संकोच नहीं की कुछ मामलों में कवर्धा सीएमएचओ ऑफिस वालों को पत्राचार करना नहीं आता । 20 जनवरी 2025 को जारी आदेश में कार्य व्यवस्था के तहत शब्द लिखा हैं । जबकि उन्हें मूल पदस्थ स्थान में कार्य करने के लिए आदेशित किया जाता है / वापस किया जाता लिखना चाहिए था।
उल्लेख
नीय है कि ऊपर दर्शित चार कर्मचारियों को डॉ मुखर्जी के कार्यकाल में उनके मूल पदस्थ स्थान से अन्यत्र संलग्न कर कार्य करने के लिए आदेशित किया गया था । जबकि विकासखंड कार्यक्रम प्रबंधक पदों पर कार्य कर रहे कर्मचारियों को अन्यत्र स्थानांतरित करने अथवा संलग्न करने का अधिकार मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को नहीं है।
बाद के वर्षों में डॉ राज के कार्यकाल में इन विकासखंड कार्यक्रम प्रबंधकों को जनवरी 2025 को उनके मूल स्थान में वापस भेजने हेतु आदेश जारी किया गया था । आश्चर्य की बात यह है कि कलेक्टर के अनुमोदन के बाद भी उक्त आदेशों का पालन एक वर्ष बीत जाने के बाद भी नहीं हुआ है । यहां तक तो ठीक था नए cmho भी संलग्नीकरण आदेश जारी करने में भी किसी से कम नहीं हैं। इन्हें भी सीनियर जूनियर से परे आदेश जारी करने से मतलब है। 8 जनवरी को जारी आदेश में पूर्व मुख्य सचिव विवेक ढांड के द्वारा जारी आदेश को एक प्रकार से चुनौती दी है ।
अब इसे उप मुख्यमंत्री के गृह जिला में भर्रासाही नहीं कहेंगे या सामंतवादी विचारधारा के अधिकारी नहीं कहेंगे तो और क्या कहेंगे ?बहरहाल स्वास्थ्य विभाग में अराजकता के बीच मेडिकल कॉलेज में इंट्री के लिए कर्मचारी लालायित दिखाई दे रहे हैं। स्थानांतरण के बाद भी वर्षो से चिकित्सक जमे हुए हैं तो कर्मचारी मनवांछित स्थानों में जाने जुगाड़ में है।
