यूरिया संकट पर किसानों का हल्लाबोल, नगाड़े की थाप से गूंजा कृषि विभाग

यूरिया संकट पर किसानों का हल्लाबोल, नगाड़े की थाप से गूंजा कृषि विभाग
कवर्धा खबर योद्धा।। खेती-किसानी के विशेष सीजन में यूरिया खाद की किल्लत से जूझ रहे किसानों का गुस्सा आखिर आज फूट पड़ा। भारतीय किसान संघ के बैनर तले बुधवार को सैकड़ों किसान उपसंचालक कृषि कार्यालय कवर्धा पहुंचे और नगाड़ा बजाकर अधिकारियों को उनकी कुंभकर्णी नींद से जगाने का प्रयास किया। किसानों ने यूरिया की कालाबाजारी और बाजार में मनमाने दाम वसूले जाने पर जमकर विरोध प्रदर्शन किया और कार्यवाही की मांग की।
खुले बाजार में लूट, किसान लाचार
किसानों का आरोप है कि प्रशासन की लापरवाही के चलते खुले बाजार में यूरिया की कालाबाजारी चरम पर है। शासन द्वारा 266 रुपये में निर्धारित यूरिया की बोरी को दुकानदार 500 से 600 रुपये तक बेच रहे हैं। किसानों का कहना है कि वे पहले ही महंगे डीजल, खाद-बीज और अन्य कृषि उपकरणों की बढ़ती लागत से परेशान हैं। ऐसे में यूरिया की अन्यायपूर्ण कीमतें उनकी आर्थिक स्थिति को और बदतर कर रही हैं।
अधिकारियों को जगाने का प्रयास
गुस्साए किसानों ने नगाड़ा बजाकर कृषि विभाग को चेताया और कहा कि यदि समय रहते यूरिया की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं की गई, तो वे और उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उनका कहना है कि सरकारी गोदामों में पर्याप्त स्टॉक होने के बावजूद प्रभावी मॉनिटरिंग नहीं होने से कालाबाजारी हो रही है। एक किसान ने कहा हमारे पास जमीन है, मेहनत है, लेकिन खाद नहीं। सरकार ने किसानों के लिए योजनाएं तो बनाई हैं, पर उसका लाभ हमें नहीं मिल पा रहा। जो खाद हमारे खेतों तक पहुंचनी चाहिए, वो व्यापारियों की जेब भर रही है।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
किसानों ने सवाल उठाया कि जिले में जब यूरिया का पर्याप्त आवंटन हुआ है, तो फिर भी वे क्यों बाजार में दोगुने-तीन गुने दाम पर यूरिया खरीदने को मजबूर हैं। किसानों ने कृषि विभाग से यह भी मांग की कि हर किसान को उसकी जरूरत के अनुसार यूरिया उपलब्ध कराई जाए और कालाबाजारी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। एक अन्य किसान ने कहा हमने आज नगाड़े बजाकर प्रशासन को जगाने का प्रयास किया है। अगर अब भी अधिकारी नहीं जागे, तो आने वाले समय में हमारी लड़ाई और तेज होगी।
कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई की मांग
किसानों ने प्रशासन से यूरिया की उपलब्धता को लेकर पारदर्शी व्यवस्था लागू करने और ऑनलाइन पोर्टल या टोल-फ्री नंबर जारी करने की भी मांग की, जिससे कालाबाजारी की शिकायतों को तुरंत दर्ज कर कार्रवाई की जा सके।
प्रदर्शन में जुटे सैकड़ों किसान
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में भारतीय किसान संघ के पदाधिकारी, किसान नेता और क्षेत्र के किसान शामिल रहे। उन्होंने संकल्प लिया कि जब तक यूरिया की कालाबाजारी पर रोक नहीं लगाई जाती और उन्हें वाजिब दाम पर खाद नहीं मिलती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
कृषि विभाग की जिम्मेदारी
अब देखने वाली बात यह है कि कृषि विभाग इस प्रदर्शन को कितनी गंभीरता से लेता है। किसानों की आवाज अब सड़क से प्रशासनिक गलियारों तक पहुंच चुकी है। यदि जल्द ही उचित कदम नहीं उठाए गए, तो यह आक्रोश और बड़ा रूप ले सकता है। किसानों का साफ कहना है कि हम अपने हक के लिए लड़ेंगे, क्योंकि जब तक खेतों में खाद नहीं पहुंचेगी, तब तक धरती भी अन्न नहीं उगलेगी।।