चकाचौंध की दुनिया से दूर ग्राम सौरु के बैगा परिवार
ना बिजली, ना पानी, ना सड़क — हर दिन संघर्ष में गुजर रही जिंदगी
कवर्धा खबर योद्धा।। विकास और आधुनिक सुविधाओं के दावों के बीच कबीरधाम जिले के बोडला विकासखंड अंतर्गत ग्राम सौरु आज भी मूलभूत सुविधाओं से कोसों दूर है। जिला मुख्यालय से लगभग 65 किलोमीटर दूर स्थित यह छोटा सा आदिवासी गांव आज भी पानी, बिजली और सड़क जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहा है। यहां रहने वाले बैगा आदिवासी परिवार चकाचौंध भरी दुनिया से बेखबर कठिन परिस्थितियों में जीवन बिताने को मजबूर हैं।

ग्राम सौरु में लगभग 20 बैगा परिवार निवासरत हैं। गांव तक पहुंचने के लिए आज भी पक्की सड़क नहीं है, जिससे बारिश के दिनों में स्थिति और अधिक गंभीर हो जाती है। सबसे बड़ी समस्या पेयजल की है। ग्रामीणों को रोजाना पानी लाने के लिए करीब 2 किलोमीटर दूर पगडंडियों से होकर जाना पड़ता है। ऊबड़-खाबड़ रास्तों से गुजरते हुए पानी ढोना यहां के लोगों की दैनिक दिनचर्या बन चुकी है। पानी लाने में ही ग्रामीणों का दो से तीन घंटे का समय लग जाता है, जिससे उनके अन्य काम भी प्रभावित होते हैं।

ग्रामीण जगनू बैगा ने बताया कि गांव में कई बार अधिकारी और जनप्रतिनिधि पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और आश्वासन भी दिए, यहां तक कि कंबल वितरण जैसे कार्यक्रम भी हुए, लेकिन मूल समस्याओं का समाधान आज तक नहीं हो सका। गांव में न तो बिजली पहुंची और न ही पानी की स्थायी व्यवस्था बनाई गई।
शिक्षा व्यवस्था की स्थिति भी चिंताजनक है। रज्जू बैगा के अनुसार गांव में प्राथमिक स्कूल तो मौजूद है, लेकिन शिक्षकों की नियमित उपस्थिति और पढ़ाई की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं है। बच्चों को आगे की पढ़ाई के लिए पंडरीपानी या बोडला जाना पड़ता है, जो दूरी और संसाधनों की कमी के कारण सभी के लिए संभव नहीं हो पाता। इससे कई बच्चे बीच में ही पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं।

रमंतू बैगा बताते हैं कि गांव के लोगों की सुबह पानी की तलाश से शुरू होती है। सुबह करीब 8 बजे महिलाएं और पुरुष बर्तन लेकर निकलते हैं और कठिन पगडंडियों से गुजरते हुए पानी लाते हैं। बिजली और सड़क जैसी सुविधाएं यहां के लोगों के लिए अब भी सपना बनी हुई हैं। रात होते ही पूरा गांव अंधेरे में डूब जाता है, जिससे बच्चों की पढ़ाई और ग्रामीणों की सुरक्षा दोनों प्रभावित होती है।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से योजनाओं और विकास की बातें सुनते आ रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत अब भी नहीं बदली है। आज भी ग्राम सौरु के लोग उम्मीद लगाए बैठे हैं कि शासन-प्रशासन उनकी समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान देगा और उन्हें भी मूलभूत सुविधाओं का अधिकार मिलेगा।
लगातार संघर्ष के बीच यह गांव आज भी एक बेहतर भविष्य की आस में जी रहा है, जहां पानी, बिजली और सड़क जैसी सुविधाएं उनके जीवन को आसान बना सकें।
