कवर्धा में अवैध खनन पर कार्रवाई के दावे खोखले, मुरूम-मिट्टी का खेल जारी
कवर्धा खबर योद्धा।। कबीरधाम जिले में अवैध खनिज उत्खनन और परिवहन को लेकर प्रशासन सख्ती के दावे कर रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से मेल नहीं खा रही। एक ओर खनिज विभाग कार्रवाई कर अर्थदंड वसूलने की बात कह रहा है, वहीं दूसरी ओर जिले के कई क्षेत्रों में मुरूम, मिट्टी और बजरी का अवैध उत्खनन खुलेआम जारी है।

जिला खनिज अधिकारी चिरंजीव कुमार के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2025-26 में अवैध परिवहन के 2 मामलों में 44 हजार रुपये और अवैध उत्खनन के 4 मामलों में 80 हजार रुपये का अर्थदंड वसूला गया है। इसके अलावा पंडरिया और कुकदूर क्षेत्र में 15 प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है। विभाग का दावा है कि नियमित निरीक्षण और निगरानी के जरिए अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण किया जा रहा है।
जमीनी हकीकत अलग, कार्रवाई सीमित
स्थानीय स्तर पर स्थिति इसके उलट नजर आती है। पंडरिया, कुकदूर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में मुरूम और मिट्टी का अवैध उत्खनन लगातार जारी है। दिन-रात ट्रैक्टर और डंपरों के जरिए खनिजों का परिवहन हो रहा है, लेकिन कार्रवाई गिनती की ही दिख रही है। कई स्थानों पर बिना अनुमति खदान संचालित होने की शिकायतें भी सामने आई हैं।
निगरानी पर उठ रहे सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि अवैध खनन की जानकारी कई बार संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई गई, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं होने से यह कारोबार फल-फूल रहा है। लोगों का आरोप है कि यदि नियमित और कड़ी कार्रवाई हो, तो इस पर रोक लगाई जा सकती है, लेकिन वर्तमान में स्थिति जस की तस बनी हुई है।
राजस्व नुकसान और पर्यावरण संकट
अवैध खनन के चलते शासन को राजस्व का नुकसान हो रहा है, वहीं पर्यावरण पर भी इसका गंभीर असर पड़ रहा है। अनियंत्रित उत्खनन से भूमि क्षरण, जलस्तर में गिरावट और ग्रामीण सड़कों की हालत खराब हो रही है।
कानूनी प्रावधानों के बावजूद ढिलाई
खनिज अधिनियम के तहत सख्त प्रावधान होने के बावजूद कार्रवाई का दायरा सीमित नजर आता है। 15 प्रकरण दर्ज होना यह संकेत देता है कि अवैध गतिविधियां बड़े स्तर पर जारी हैं, लेकिन कार्रवाई उसी अनुपात में नहीं हो रही, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
निष्कर्ष
कवर्धा जिले में अवैध खनन पर नियंत्रण के दावे फिलहाल अधूरे नजर आ रहे हैं। सख्ती के दावों के बीच अवैध कारोबार बेखौफ जारी है। ऐसे में जरूरत है कि कागजी कार्रवाई से आगे बढ़कर जमीनी स्तर पर ठोस और लगातार कदम उठाए जाएं, ताकि इस पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
