SIR पर सवाल उठाने वाली कांग्रेस पहले अपने गिरेबान में झाँके : कैलाश चंदवंशी

SIR पर सवाल उठाने वाली कांग्रेस पहले अपने गिरेबान में झाँके : कैलाश चंदवंशी

कवर्धा खबर योद्धा।। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कांग्रेस द्वारा किए जा रहे राजनीतिक विरोध पर जिला पंचायत उपाध्यक्ष एवं भाजपा नेता कैलाश चंदवंशी ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी से लेकर छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री एवं विधायक मोहम्मद अकबर तक को पहले अपने कार्यकाल और अपनी राजनीतिक भूमिका से जुड़े सवालों का जवाब देना चाहिए। जो कांग्रेस आज SIR की प्रक्रिया पर सवाल उठाकर जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रही है, उसे पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि उसके शासनकाल में मतदाता सूचियों की शुद्धता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए गए थे।

कैलाश चंदवंशी ने कहा कि मतदाता सूची लोकतंत्र की बुनियाद है और इसमें किसी भी प्रकार की अनियमितता लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर विषय है। यदि किसी व्यक्ति का नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज था, किसी मृत व्यक्ति का नाम सूची में बना हुआ था अथवा किसी मतदाता का नाम उसके वास्तविक निवास क्षेत्र से अलग स्थान पर दर्ज कराया गया था, तो इन मामलों की निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए। ऐसे सवालों को राजनीतिक बयानबाजी से दबाया नहीं जा सकता।

*2025 में भी उठाए थे मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के मामले*

चंदवंशी ने कहा कि वर्ष 2025 में भी उन्होंने प्रेस के माध्यम से मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए थे। उस समय उन्होंने कुछ ऐसे नामों और मामलों का उल्लेख किया था, जिनकी निर्वाचन अभिलेखों के आधार पर जाँच किए जाने की आवश्यकता बताई गई थी।

उन्होंने बताया कि उनके द्वारा उठाए गए मामलों में तैय्यब खान का नाम रायपुर विधानसभा क्षेत्र में दर्ज होने के साथ-साथ कवर्धा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम बचेड़ी में भी दर्ज होने की बात सामने रखी गई थी। इसी प्रकार रमीज कुट्टी के संबंध में यह सवाल उठाया गया था कि उनका नाम रायपुर ग्रामीण क्षेत्र की मतदाता सूची में होने के बावजूद कवर्धा विधानसभा क्षेत्र में भी दर्ज कराया गया था तथा उनके जन्मस्थान के रूप में कवर्धा का उल्लेख किया गया था।

चंदवंशी ने कहा कि इन मामलों सहित ऐसे अन्य नामों के संबंध में भी सवाल उठाए गए थे, जिनमें कथित तौर पर एक से अधिक स्थानों पर नाम दर्ज होने अथवा मृत व्यक्तियों के नाम मतदाता सूची में बने रहने की बात कही गई थी। इन सभी मामलों की निर्वाचन आयोग के रिकॉर्ड से जाँच कर वास्तविक स्थिति जनता के सामने रखी जानी चाहिए।

*राहुल गांधी जवाब दें, SIR से इतनी परेशानी क्यों?*

कैलाश चंदवंशी ने कहा कि राहुल गांधी लगातार चुनावी प्रक्रियाओं और मतदाता सूची को लेकर सवाल उठाते हैं, लेकिन देश की जनता यह जानना चाहती है कि मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी, सटीक और त्रुटिरहित बनाने की प्रक्रिया का विरोध क्यों किया जा रहा है। यदि कांग्रेस को अपनी बात और अपने आरोपों पर भरोसा है, तो उसे तथ्यों और प्रमाणों के साथ सामने आना चाहिए, न कि हर प्रशासनिक प्रक्रिया को राजनीतिक विवाद का विषय बनाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि SIR किसी राजनीतिक दल के हित-अहित का विषय नहीं, बल्कि मतदाता सूची की शुद्धता और लोकतंत्र की विश्वसनीयता से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। पात्र मतदाता का नाम सूची में बना रहे और अपात्र, दोहरे अथवा नियमानुसार हटाए जाने योग्य नामों की उचित प्रक्रिया के तहत जाँच हो—यह सुनिश्चित करना आवश्यक है। साथ ही किसी भी पात्र नागरिक का नाम गलत तरीके से नहीं हटना चाहिए।

*EVM से लेकर SIR तक कांग्रेस के बदलते आरोप, आखिर सच क्या है?*

कैलाश चंदवंशी ने कांग्रेस की चुनावी राजनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब चुनाव परिणाम उसके पक्ष में आते हैं, तब निर्वाचन व्यवस्था पर भरोसा जताया जाता है, लेकिन जब परिणाम अनुकूल नहीं होते, तब EVM, मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की जाती है। कांग्रेस के इस बदलते राजनीतिक रुख पर देश की जनता को गंभीरता से विचार करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि देश के अलग-अलग राज्यों में कांग्रेस के नेताओं ने समय-समय पर मतदाता सूची में कथित फर्जी नामों और अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं, चुनावी हार के बाद EVM में गड़बड़ी और चुनाव में धांधली के आरोप भी लगाए जाते रहे हैं। अब SIR की प्रक्रिया पर सवाल उठाकर यह संदेश देने का प्रयास किया जा रहा है कि मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं। यदि मतदाता सूची में गड़बड़ी है, तो उसकी जाँच होनी चाहिए; यदि EVM पर आरोप हैं, तो प्रमाण प्रस्तुत किए जाने चाहिए; और यदि किसी पात्र मतदाता का नाम काटा जा रहा है, तो उस मामले में निर्वाचन आयोग के समक्ष तथ्य रखे जाने चाहिए। केवल आरोप लगाना और जनता के बीच अविश्वास पैदा करना किसी जिम्मेदार राजनीतिक दल की भूमिका नहीं हो सकती।

चंदवंशी ने कहा कि कांग्रेस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर उसकी आपत्ति किस बात पर है—मतदाता सूची की जाँच पर, कथित दोहरी प्रविष्टियों की पहचान पर या चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के प्रयासों पर? यदि कांग्रेस का उद्देश्य लोकतंत्र को मजबूत करना है, तो उसे सुधार की प्रक्रिया में सहयोग करना चाहिए, न कि हर कदम पर राजनीतिक टकराव पैदा करना चाहिए।

*छत्तीसगढ़ में 2018 में 72 सीटें मिलीं, तब EVM और मतदाता सूची पर सवाल क्यों नहीं?*

कैलाश चंदवंशी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 90 में से 72 सीटें मिली थीं और उसने स्पष्ट बहुमत की सरकार बनाई थी। उस समय कांग्रेस ने जीत हासिल की, तब आज की तरह EVM और चुनावी प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठाने की राजनीति कहाँ थी? कांग्रेस की जीत को जनता का जनादेश माना गया, लेकिन जब जनता ने बाद के चुनावों में अलग निर्णय दिया, तब चुनावी व्यवस्था पर सवाल उठाने का सिलसिला तेज हो गया।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जीत का श्रेय अपनी लोकप्रियता को देना और हार का ठीकरा निर्वाचन व्यवस्था पर फोड़ना राजनीतिक अवसरवाद है। चुनाव परिणाम जनता तय करती है। कभी जनता किसी दल को सत्ता देती है, तो कभी विपक्ष में बैठने का अवसर देती है। जनादेश को स्वीकार करना प्रत्येक राजनीतिक दल का संवैधानिक और लोकतांत्रिक दायित्व है।

चंदवंशी ने कहा कि कांग्रेस के इस दोहरे रवैये को जनता समझ चुकी है। लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सवाल उठाना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन उन सवालों के समर्थन में प्रमाण और तथ्यों का होना भी उतना ही आवश्यक है। हर चुनाव के बाद व्यवस्था पर अविश्वास जताने से जनता का विश्वास मजबूत नहीं होगा, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति अनावश्यक भ्रम पैदा होगा।

*कांग्रेस जनता से जुड़ने के बजाय अविश्वास और राजनीतिक अराजकता का माहौल बना रही है*

कैलाश चंदवंशी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस जनहित के ठोस मुद्दों पर जनता के बीच जाने के बजाय चुनावी प्रक्रियाओं को लेकर विवाद खड़ा करने में अधिक रुचि दिखा रही है। कभी EVM पर सवाल, कभी मतदाता सूची पर आरोप और अब SIR को लेकर विरोध—यह सिलसिला आखिर कब तक चलेगा?

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की आलोचना करना और निर्वाचन प्रक्रिया में कमियाँ सामने लाना पूरी तरह जायज है, लेकिन किसी भी आरोप को बिना प्रमाण अंतिम सत्य बताना उचित नहीं है। कांग्रेस को चाहिए कि वह जनता के वास्तविक मुद्दों, विकास, रोजगार, किसानों, युवाओं और गरीबों से जुड़े सवालों पर अपनी भूमिका स्पष्ट करे।

उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध के नाम पर यदि लगातार संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास फैलाया जाएगा, तो इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर होगी। कांग्रेस को यह समझना चाहिए कि सत्ता केवल राजनीतिक आरोपों से नहीं, बल्कि जनता के विश्वास, काम और जवाबदेही से प्राप्त होती है।

*मोहम्मद अकबर अपने कार्यकाल से जुड़े सवालों का जवाब दें*

चंदवंशी ने पूर्व मंत्री एवं विधायक मोहम्मद अकबर को लेकर कहा कि उनके कार्यकाल से संबंधित मतदाता सूची के जिन मामलों को वर्ष 2025 में सार्वजनिक रूप से उठाया गया था, उन पर तथ्यों के आधार पर स्पष्टता आनी चाहिए। कांग्रेस को यह बताना चाहिए कि उस समय मतदाता सूची में कथित दोहरी प्रविष्टियों, मृत व्यक्तियों के नाम और अलग-अलग क्षेत्रों में दर्ज नामों की जाँच को लेकर क्या स्थिति थी।

उन्होंने कहा कि केवल आरोपों से बचने के लिए राजनीतिक बयान देना पर्याप्त नहीं है। यदि निर्वाचन रिकॉर्ड में किसी प्रकार की गड़बड़ी थी, तो उसकी जाँच होनी चाहिए और यदि आरोप गलत हैं, तो संबंधित रिकॉर्ड के आधार पर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। लोकतंत्र में जवाबदेही सभी राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों की होनी चाहिए।

चंदवंशी ने कहा कि मोहम्मद अकबर को जनता के सामने इन सवालों का जवाब देना चाहिए कि वर्ष 2025 में उठाए गए मामलों की वास्तविक स्थिति क्या थी, क्या संबंधित निर्वाचन अधिकारियों के समक्ष शिकायतें प्रस्तुत की गई थीं और जाँच में क्या तथ्य सामने आए। राजनीतिक पद पर रहने वाले व्यक्ति से सवाल पूछना लोकतंत्र का हिस्सा है और इन सवालों का जवाब तथ्यों के आधार पर दिया जाना चाहिए।

*उमंग पांडे का मोहम्मद अकबर पर तीखा हमला: सवालों से बचने की राजनीति बंद करें*

भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष उमंग पांडे ने भी पूर्व मंत्री एवं विधायक मोहम्मद अकबर पर तीखा राजनीतिक हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस नेताओं को SIR पर राजनीति करने से पहले मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं से जुड़े सवालों का जवाब देना चाहिए।

उमंग पांडे ने कहा कि मोहम्मद अकबर को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वर्ष 2025 में मतदाता सूची से संबंधित जो मामले सार्वजनिक रूप से उठाए गए थे, उनकी जाँच और वास्तविक स्थिति क्या है। यदि भाजपा नेताओं द्वारा उठाए गए सवाल गलत हैं, तो निर्वाचन रिकॉर्ड के आधार पर उन्हें गलत साबित किया जाए। लेकिन यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो उसकी निष्पक्ष जाँच और जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस की राजनीति का दोहरा मापदंड अब नहीं चलने वाला। अपनी जीत पर चुनावी व्यवस्था को सही बताना और हार के बाद उसी व्यवस्था पर सवाल उठाना जनता के साथ राजनीतिक अवसरवाद है। राहुल गांधी से लेकर स्थानीय कांग्रेस नेताओं तक को यह समझना होगा कि लोकतंत्र में आरोप लगाने के साथ प्रमाण देना भी जरूरी है।

उमंग पांडे ने कहा कि मोहम्मद अकबर को SIR के विरोध में बयानबाजी करने के बजाय मतदाता सूची से जुड़े सवालों पर तथ्य सामने रखने चाहिए। जनता जानना चाहती है कि जिन नामों को लेकर सवाल उठाए गए थे, उनकी वास्तविक स्थिति क्या थी। कांग्रेस को सवालों से बचने के बजाय जवाबदेही की राजनीति करनी चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि युवा मोर्चा लोकतांत्रिक व्यवस्था की पारदर्शिता, निष्पक्ष चुनाव और पात्र मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के पक्ष में है। किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से नहीं कटना चाहिए और मतदाता सूची में मौजूद कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए। इस विषय पर राजनीति करने के बजाय कांग्रेस को तथ्यों के आधार पर अपना पक्ष रखना चाहिए।

जितेन्द्र राज नामदेव

एडिटर इन चीफ - खबर योद्धा

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