सखी सैया तो खूब ही कमात है महंगाई डायन खाए जात है

सखी सैया तो खूब ही कमात है महंगाई डायन खाए जात है

पनीर की कार्रवाई के बीच बढ़ती महंगाई से भटका जनता का ध्यान, खाद्य सामग्री के दामों में भारी उछाल

पनीर की कार्रवाई के बीच महंगाई का मुद्दा पीछे छूटा, खाद्य सामग्री के बढ़ते दामों से रसोई का बजट बिगड़ा

कवर्धा खबर योद्धा।। आज बढ़ते हुए खाद्य साम्रगी के दामों ने फिल्म पीपली लाइव मूवी के उस गाने को फिर से ताजा कर दिया। सखी सैया तो खूब ही कमात है महंगाई डायन खाए जात है। डीजल महंगा है पेट्रोल शक्कर भाई के का बोल….

 

इसी तरह अब लोग बढ़ते हुए महंगाई से परेशान होते नजर आ रहे है ।

ज्ञात हो कि

जिले में इन दिनों खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और पनीर में मिलावट को लेकर विभागीय कार्रवाई चर्चा में है। कार्रवाई को लेकर लोगों का ध्यान केंद्रित है, लेकिन इसी बीच रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली खाद्य सामग्री की बढ़ती कीमतों का मुद्दा कहीं पीछे छूटता नजर आ रहा है। लगातार बढ़ रहे दामों ने आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। शक्कर, खाद्य तेल सहित पैकेटबंद खाद्य सामग्री की कीमत और मात्रा में बदलाव का सीधा असर अब लोगों की जेब पर पड़ रहा है।

जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ समय में कई खाद्य पदार्थों की कीमतों में करीब 8 से 9 प्रतिशत तक की वृद्धि होने की बात सामने आ रही है। सबसे ज्यादा असर उन वस्तुओं पर दिखाई दे रहा है, जिनका इस्तेमाल हर घर में प्रतिदिन होता है। उपभोक्ताओं का कहना है कि पहले की तुलना में अब सीमित बजट में महीने भर की जरूरत का सामान जुटाना मुश्किल होता जा रहा है।

शक्कर के दाम में बड़ा अंतर

शक्कर की कीमतों में हुई बढ़ोतरी को लेकर उपभोक्ताओं में खास नाराजगी है। बताया जा रहा है कि 3 अगस्त के आसपास शक्कर करीब 42 रुपये प्रति किलो की दर से उपलब्ध थी, जबकि वर्तमान में इसकी कीमत करीब 72 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने का दावा किया जा रहा है। यदि यह मूल्य अंतर बाजार स्तर पर कायम है तो महज कुछ सप्ताह में कीमत में हुई यह बढ़ोतरी आम परिवारों के लिए चिंता का विषय है। शक्कर चाय, मिठाई और दैनिक उपयोग की कई चीजों में इस्तेमाल होने के कारण इसका असर सीधे घरेलू बजट पर पड़ता है।

पैकेट में मात्रा घटने की भी शिकायत

महंगाई का असर केवल कीमत बढ़ने तक सीमित नहीं है। पैकेटबंद खाद्य सामग्री को लेकर उपभोक्ताओं की एक और चिंता सामने आ रही है। कई उत्पादों में पैकेट की कीमत लगभग समान रहने के बावजूद उसकी मात्रा कम किए जाने की शिकायत है। उपभोक्ताओं का कहना है कि कुछ पैकेटों में 50 ग्राम तक सामग्री कम मिल रही है। इससे ग्राहक को पहली नजर में कीमत बढ़ने का अहसास नहीं होता, लेकिन कम मात्रा मिलने के कारण वास्तविक लागत बढ़ जाती है।

उदाहरण के तौर पर यदि कोई उपभोक्ता पहले एक निश्चित वजन का पैकेट खरीदता था और अब उसी या लगभग समान कीमत में कम वजन का उत्पाद मिल रहा है, तो प्रति ग्राम या प्रति किलो वास्तविक कीमत बढ़ जाती है। ऐसे बदलावों की जानकारी उपभोक्ताओं को पैकेट पर अंकित वजन और मूल्य की तुलना करने के बाद ही स्पष्ट हो पाती है।

खाद्य तेल ने भी बढ़ाया रसोई का खर्च

खाद्य तेल की कीमतों में भी करीब 18 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी बताए जाने से घरेलू बजट पर अतिरिक्त भार पड़ा है। खाना पकाने में तेल की नियमित आवश्यकता होने के कारण इसकी कीमत में मामूली बढ़ोतरी भी महीने के कुल खर्च को प्रभावित करती है। शक्कर, तेल और अन्य जरूरी खाद्य सामग्री के दाम बढ़ने से मध्यम वर्ग और सीमित आय वाले परिवारों को खर्च का संतुलन बनाने में कठिनाई हो रही है।

कीमत के साथ मात्रा की भी हो निगरानी

उपभोक्ताओं का कहना है कि खाद्य विभाग द्वारा मिलावट के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है, लेकिन इसके साथ बाजार में खाद्य वस्तुओं के दाम, पैकेट पर अंकित अधिकतम खुदरा मूल्य, वजन और वास्तविक मात्रा की भी नियमित निगरानी होनी चाहिए। खासकर ऐसे उत्पादों की जांच जरूरी है, जिनमें कीमत समान रखते हुए मात्रा कम की जा रही है।

लोगों की मांग है कि प्रशासन खाद्य सामग्री की बढ़ती कीमतों के कारणों की पड़ताल करे और बाजार में मूल्य व पैकेजिंग संबंधी नियमों के पालन की नियमित जांच कराए। पनीर जैसी खाद्य सामग्री पर कार्रवाई के साथ-साथ रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की कीमत और मात्रा से जुड़े मुद्दों पर भी प्रशासन का ध्यान जाए, ताकि उपभोक्ताओं को राहत मिल सके और उन्हें अपनी जरूरत की सामग्री उचित कीमत व निर्धारित मात्रा में मिल सके

जितेन्द्र राज नामदेव

एडिटर इन चीफ - खबर योद्धा

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