ऐतिहासिक भोरमदेव मंदिर में महाअनुष्ठान: 25 से 29 जुलाई तक होगी ‘महाचतुर शुद्धि सहस्र कलशम्’ पूजा

ऐतिहासिक भोरमदेव मंदिर में महाअनुष्ठान: 25 से 29 जुलाई तक होगी ‘महाचतुर शुद्धि सहस्र कलशम्’ पूजा

कवर्धा खबर योद्धा।। छत्तीसगढ़ के ‘खजुराहो’ के नाम से विख्यात कबीरधाम स्थित ऐतिहासिक भोरमदेव महादेव मंदिर में लंबे अंतराल के बाद दिव्य अनुष्ठान ‘महाचतुर शुद्धि सहस्र कलशम् 2026’ होने जा रहा है। श्री महा दिव्य देशम् फाउंडेशन (SMDDF) और भोरमदेव सनातन तीर्थ ट्रस्ट, कबीरधाम के तत्वावधान में यह पांच दिवसीय वृहद अनुष्ठान 25 जुलाई से 29 जुलाई (गुरु पूर्णिमा) तक आयोजित किया जा रहा है।

मैकाल पहाड़ियों की तलहटी में 1089 ईस्वी में नागवंशी राजा गोपालदेव के शासनकाल में निर्मित यह मंदिर महज़ एक ढांचा नहीं, बल्कि शैव आगम पद्धति, तांत्रिक साधना और गोंड-बैगा आदिवासियों की प्रकृति-पूजा (बूढ़ादेव) का एक दुर्लभ समन्वय है। वास्तु विज्ञान के अनुसार पूर्वमुखी इस मंदिर में सूर्य की किरणें सीधे शिवलिंग पर पड़ती हैं। यहां की प्रतिमाएं शिव-शक्ति के मिलन और तांत्रिक साधना में कुंडलिनी जागरण का प्रतीक हैं। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य मड़वा महल और छेरकी महल जैसे पूरे अनुष्ठानिक परिपथ को फिर से जाग्रत करना है। अनुष्ठान केरल से आए दिव्य पुजारियों द्वारा वैदिक परंपरा व क्रियाओं के साथ संपन्न कराया जाएगा। इस दौरान भुवनेश्वर से आए पद्मश्री गुरुजी के शिष्यों द्वारा नृत्य के माध्यम से भगवान की आराधना की जाएगी, साथ ही केरल के पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुनों से भी ईश्वर की स्तुति होगी।

फाउंडेशन के संस्थापक श्री आरआर जी ने अपने संदेश में स्पष्ट किया है कि यह आयोजन मंदिरों को पर्यटन स्थल तक सीमित रखने के बजाय, उन्हें पुनः ‘जाग्रत ऊर्जा केंद्रों’ के रूप में स्थापित करने की एक सकारात्मक पहल है। शास्त्रों और आगमों के अनुसार यह देव-ऊर्जा के जीर्णोद्धार का पवित्र अनुष्ठान है, जिसमें प्रकृति, क्षेत्रपालों और ईश्वरीय शक्ति का मिलन होगा। यह पूजा मंदिर के साथ-साथ पूरे परिक्षेत्र के लिए लाभकारी और ऊर्जावान साबित होगी।

अनुष्ठान का विस्तृत कार्यक्रम:

* 25 जुलाई (एकादशी): प्रथम दिवस गणपति व मृत्युंजय होमम, रुद्राभिषेक और भगवद् सेवा का अनुष्ठान हुआ।

 

हिंदू सनातन धर्म, विशेषकर दक्षिण भारतीय और वैदिक पूजा पद्धतियों में इन अनुष्ठानों का अत्यंत महत्व है। इन सभी प्रक्रियाओं में अलग-अलग देवी-देवताओं का आह्वान और विशेष अनुष्ठान शामिल होते हैं:

गणपति होमम (Ganapati Homam)

* उद्देश्य: विघ्नहर्ता भगवान गणेश को समर्पित यह हवन किसी भी नए कार्य, भवन निर्माण, व्यापार या बड़े अनुष्ठान की शुरुआत से पहले किया जाता है, ताकि मार्ग में आने वाली सभी बाधाएं दूर हों।

* पूजा विधि: इसमें सबसे पहले अग्नि प्रज्वलित कर गणेश जी का आह्वान किया जाता है। ‘गणपति अथर्वशीर्ष’ या गणेश मंत्रों के उच्चारण के साथ अग्नि में गाय का शुद्ध घी, दूर्वा (घास), अष्टद्रव्य, मोदक, गुड़, नारियल और विशेष हवन सामग्री की आहुतियां दी जाती हैं।

मृत्युंजय होमम (Mrityunjaya Homam)

* उद्देश्य: यह हवन भगवान शिव के ‘महामृत्युंजय’ स्वरूप की आराधना है। इसे गंभीर बीमारियों से मुक्ति, अकाल मृत्यु के भय को दूर करने, ग्रह दोष शांति और दीर्घायु (लंबी उम्र) प्राप्त करने के लिए किया जाता है।

* पूजा विधि: इस हवन में ऋत्विजों (पंडितों) द्वारा महामृत्युंजय मंत्र (ॐ त्र्यम्बकं यजामहे…) का निरंतर जाप किया जाता है। मंत्रोच्चार के साथ अग्नि में गिलोय (अमृता), काले तिल, दूर्वा, पलाश की समिधा और गाय के घी की विशेष आहुतियां दी जाती हैं।

रुद्राभिषेक (Rudrabhishek)

* उद्देश्य: भगवान शिव को प्रसन्न करने, पापों के नाश और मनोकामना पूर्ति के लिए यह एक अत्यंत शक्तिशाली अनुष्ठान है।

* पूजा विधि: इसमें यजुर्वेद के ‘रुद्र सूक्त’ (रुद्राष्टाध्यायी) के वैदिक मंत्रों का सस्वर पाठ किया जाता है। मंत्रों की गूंज के बीच शिवलिंग पर श्रृंगी (गाय के सींग या धातु का पात्र) के माध्यम से पंचामृत (गाय का दूध, दही, घी, शहद, शक्कर), गन्ने का रस, नारियल पानी, भस्म, भांग और गंगाजल की सतत धारा अर्पित कर स्नान कराया जाता है। इसके बाद बिल्वपत्र और धतूरा चढ़ाया जाता है।

 

 

* 26 जुलाई (द्वादशी): एकादश रुद्राभिषेक, कूष्माण्डी व तिल होमम और उमामहेश्वर होमम।

* 27 जुलाई (त्रयोदशी): अघोररुद्र होमम, परिसर शुद्धिकरण, अस्त्रकलश पूजा, वास्तु होमम व वास्तु बलि।

* 28 जुलाई (चतुर्दशी): चतुःशुद्धि, कलशाभिषेक, शिवलिंग स्थापनम, अष्टदिक् पालक आवाहनम, योगिनी त्वरिता पूजा और महादेव के लिए विशेष संगीत-नृत्य-वाद्य अर्चना।

* 29 जुलाई (पूर्णिमा): सहस्र कलशाभिषेक, उषा पूजा, शिवलिंग निमंजनम और शाम को श्री चक्र पूजा के साथ भव्य समापन।

श्रद्धालुओं के लिए नियम व व्यवस्था:

* पूजा का समय सुबह 6 बजे से 11 बजे तक और शाम 5 बजे से 7 बजे तक रहेगा।

* संकल्प में भाग लेने वाले श्रद्धालुओं को अनुष्ठान से 3-5 दिन पूर्व से ही मांसाहार का पूर्ण त्याग करना अनिवार्य होगा।

* मंदिर परिसर में प्रवेश केवल पारंपरिक भारतीय पोशाक (शर्ट, कुर्ता-पायजामा, साड़ी, सूट आदि) में ही दिया जाएगा।

* ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर पूर्व-पंजीकरण कराने वाले भक्तों के लिए आवास की समुचित व्यवस्था की जाएगी।

जितेन्द्र राज नामदेव

एडिटर इन चीफ - खबर योद्धा

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