युवा कांग्रेस ने भूमाफियाओं को लाभ पहुंचाने का लगाया आरोप, प्रशासन से संयुक्त जांच की मांग

अवैध प्लाटिंग पर सियासत गरम, करोड़ों की सड़क परियोजनाओं पर भी उठे सवाल

युवा कांग्रेस ने भूमाफियाओं को लाभ पहुंचाने का लगाया आरोप, प्रशासन से संयुक्त जांच की मांग

कवर्धा खबर योद्धा।। शहर से लगे जेवड़नकला क्षेत्र में कथित अवैध प्लाटिंग और उसी क्षेत्र में लोक निर्माण विभाग की छह करोड़ 45 लाख रुपये से अधिक की सड़क परियोजनाओं को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। प्रदेश युवा कांग्रेस के प्रदेश सचिव आकाश केशरवानी ने जिलाधीश को शिकायत सौंपकर आरोप लगाया है कि कृषि भूमि पर बिना वैधानिक अनुमति के प्लाटिंग की जा रही है और प्रस्तावित सड़क निर्माण से इसका सीधा लाभ भूमाफियाओं को मिलने की आशंका है। मामले को लेकर प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि जिन पर आरोप लगाए गए हैं, उन्होंने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए नियमानुसार कार्य होने का दावा किया है।

 

कृषि भूमि पर अवैध प्लाटिंग का आरोप

शिकायत में कहा गया है कि कैलाश नगर से जेवड़नकला मार्ग तथा सरस्वती शिशु मंदिर भागुटोला के पीछे स्थित राजस्व निरीक्षक हल्का राजानवागांव अंतर्गत कृषि भूमि के कई खसरों पर बिना सक्षम अनुमति के प्लॉट काटे जा रहे हैं। आरोप है कि भूमि पर मुरूम और गिट्टी डालकर रास्ते भी बनाए गए हैं, जो भू-राजस्व संहिता तथा नगर एवं ग्राम निवेश संबंधी नियमों का उल्लंघन है। शिकायत में प्रशासन से तत्काल जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की गई है।

 

सड़क परियोजनाओं ने बढ़ाई चर्चा

 

विवाद इसलिए और गहरा गया है क्योंकि जिन क्षेत्रों में अवैध प्लाटिंग की शिकायत की गई है, वहीं लोक निर्माण विभाग द्वारा दो सड़क परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। इनमें कवर्धा-लोहारा मुख्य मार्ग से सरस्वती शिशु मंदिर, सुधाविहार भागुटोला से जेवड़न तक सड़क निर्माण तथा स्वपन पेट्रोल पंप कैलाश नगर से जेवड़न तक पुल-पुलिया सहित सड़क निर्माण शामिल है। दोनों परियोजनाओं की कुल लागत लगभग छह करोड़ 45 लाख रुपये से अधिक बताई जा रही है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इससे अवैध प्लाटिंग को अप्रत्यक्ष लाभ मिल सकता है।

 

निविदा से पहले गतिविधियों पर भी सवाल

 

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि सड़क निर्माण के लिए ऑनलाइन निविदा जमा करने की अंतिम तिथि 22 जून 2026 थी, लेकिन उससे पहले ही संबंधित स्थल पर मुरूम डालने जैसी प्रारंभिक गतिविधियां दिखाई दीं। शिकायतकर्ता ने इसे गंभीर अनियमितता बताते हुए पूरे मामले की तकनीकी और प्रशासनिक जांच कराने की मांग की है।

 

क्या कहते हैं नियम

 

छत्तीसगढ़ ग्राम पंचायत (कालोनाइजर का रजिस्ट्रीकरण, निर्बंधन तथा शर्तें) नियम, 1999 के अनुसार किसी भी कृषि भूमि को कॉलोनी के रूप में विकसित करने से पहले निर्धारित स्वीकृतियां लेना अनिवार्य है। कॉलोनाइजर को सड़क, नाली, पेयजल, विद्युत, हरित क्षेत्र सहित सभी मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था करनी होती है। नियमों के उल्लंघन पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।

 

आरोप निराधार, सभी कार्य नियमों के अनुसार : संबंधित पक्ष

 

जिन पर आरोप लगाए गए हैं, उनका कहना है कि शिकायत पूरी तरह निराधार और तथ्यों से परे है। उनका कहना है कि संबंधित भूमि और निर्माण कार्य नियमानुसार किए जा रहे हैं तथा किसी भी प्रकार की अवैध प्लाटिंग नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन जांच कराता है तो सभी तथ्य स्पष्ट हो जाएंगे और सच्चाई सामने आ जाएगी।

 

अब प्रशासन की कार्रवाई पर निगाह

 

शिकायत के बाद अब जिला प्रशासन के सामने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की चुनौती है। यदि जांच में शिकायत सही पाई जाती है तो अवैध प्लाटिंग के साथ-साथ करोड़ों रुपये की सार्वजनिक परियोजनाओं के उपयोग और विभागीय प्रक्रियाओं की भी जांच हो सकती है। वहीं यदि आरोप गलत साबित होते हैं तो शिकायतकर्ता के दावों की भी पड़ताल होगी। फिलहाल पूरे मामले पर प्रशासन की अगली कार्रवाई का इंतजार है।

जितेन्द्र राज नामदेव

एडिटर इन चीफ - खबर योद्धा

error: Content is protected !!