स्कूल खुले, लेकिन बच्चों के हाथ खाली पंडरिया के कई स्कूलों में अधूरी किताबें और नई ड्रेस का इंतजार, पुराने यूनिफॉर्म में पहुंच रहे छात्र

स्कूल खुले, लेकिन बच्चों के हाथ खाली पंडरिया के कई स्कूलों में अधूरी किताबें और नई ड्रेस का इंतजार, पुराने यूनिफॉर्म में पहुंच रहे छात्र

 

कवर्धा ख़बर योद्धा ।। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत हुए आठ दिन बीत चुके हैं, लेकिन पंडरिया विकासखंड के कई विद्यालयों में विद्यार्थियों को अब तक पूरी पाठ्यपुस्तकें और नई गणवेश उपलब्ध नहीं हो सकी है। कई बच्चे पिछले वर्ष की पुरानी और खराब हो चुकी यूनिफॉर्म पहनकर स्कूल पहुंच रहे हैं, वहीं कुछ विद्यार्थी बिना गणवेश के ही पढ़ाई करने को मजबूर हैं।

 

कई कक्षाओं में सभी विषयों की किताबें नहीं पहुंचने से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। सत्र की शुरुआत में ही सामने आई इस स्थिति को लेकर पालकों और जनप्रतिनिधियों ने चिंता जताई है। शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के दावों के बीच जमीनी हालात ने सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

सुविधाओं के दावों के बीच इंतजार जारी

 

पंडरिया विकासखंड के विद्यालयों को बेहतर सुविधाओं से जोड़ने और निजी स्कूलों जैसी व्यवस्था विकसित करने के दावे किए जाते रहे हैं। लेकिन क्षेत्र के लोगों का कहना है कि कई जरूरी सुविधाएं अब भी अधूरी हैं।

 

सांदीपनि विद्यालयों के लिए प्रस्तावित बस सेवा का इंतजार भी लंबे समय से जारी है। दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को आज भी आवागमन की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इससे विद्यालयों को मॉडल बनाने के दावों और वास्तविक स्थिति के बीच अंतर नजर आ रहा है।

 

पुरानी ड्रेस से चल रहा काम

 

कई विद्यालयों में पिछले वर्ष बची हुई गणवेश से व्यवस्था संभालने का प्रयास किया गया, लेकिन इसका लाभ सभी विद्यार्थियों को नहीं मिल सका। बड़ी संख्या में बच्चे अब भी नई ड्रेस का इंतजार कर रहे हैं।

 

कई विद्यार्थियों की पुरानी यूनिफॉर्म छोटी हो चुकी है और कुछ की हालत खराब है। इसके बावजूद नई गणवेश नहीं मिलने के कारण उन्हें उसी स्थिति में स्कूल जाना पड़ रहा है।

 

शाला प्रवेश उत्सव की तैयारियों पर सवाल

 

शिक्षा विभाग द्वारा शाला प्रवेश उत्सव को जनभागीदारी के साथ मनाने के निर्देश दिए गए थे। इसमें शाला विकास समितियों, पालकों और जनप्रतिनिधियों की भागीदारी की बात कही गई थी।

 

हालांकि कई विद्यालयों में कार्यक्रम केवल औपचारिक स्वागत तक सीमित रहने की बात सामने आई है। इससे नए सत्र की तैयारियों और विभागीय समन्वय पर सवाल उठ रहे हैं।

 

जनप्रतिनिधियों ने जताई चिंता

 

जिला पंचायत सदस्य अन्नपूर्णा रामगोपाल चंद्राकर ने कहा कि नए सत्र के शुरुआती दिनों में ही विद्यार्थियों को किताबें और गणवेश मिल जानी चाहिए। सामग्री के इंतजार से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है। विभाग को इस दिशा में जल्द कार्रवाई करनी चाहिए।

 

वहीं जिला पंचायत सदस्य राजेश्वरी महेंद्र घृतलहरे ने कहा कि हर विद्यार्थी तक समय पर पुस्तकें और गणवेश पहुंचना जरूरी है। सभी बच्चों को समान अवसर और सुविधाएं मिलनी चाहिए।

 

पालकों की नाराजगी

 

पालक अशोक भास्कर, नारायण साहू, टेकाराम साहू, उमेश यादव, कैलाश पटेल और मुरलीधर पटेल ने कहा कि कई बच्चे पिछले साल की खराब हो चुकी ड्रेस पहनकर स्कूल जा रहे हैं। कुछ बच्चों के पास गणवेश तक नहीं है।

 

उन्होंने मांग की कि किताबें और यूनिफॉर्म जल्द उपलब्ध कराई जाएं, ताकि बच्चों की पढ़ाई नियमित रूप से चल सके।

 

विभाग का दावा- जल्द पूरा होगा वितरण

 

विकासखंड शिक्षा अधिकारी दीपक ठाकुर ने बताया कि लगभग 90 प्रतिशत पाठ्यपुस्तकों का वितरण पूरा हो चुका है। तकनीकी कारणों और स्कैनिंग प्रक्रिया के चलते कुछ वितरण प्रभावित हुआ है, जिसे जल्द पूरा कर लिया जाएगा।

 

उन्होंने बताया कि पुरानी गणवेश के एक्सचेंज के बाद नई गणवेश तैयार की जा रही है। नई ड्रेस प्राप्त होते ही विद्यार्थियों को वितरित कर दी जाएगी।

जितेन्द्र राज नामदेव

एडिटर इन चीफ - खबर योद्धा

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