स्थायी भवन निर्माणाधीन, इसलिए अटकी मान्यता की राह 50 सीटों की तैयारी के बीच कवर्धा मेडिकल कॉलेज पर टिकी निगाहें

स्थायी भवन निर्माणाधीन, इसलिए अटकी मान्यता की राह 50 सीटों की तैयारी के बीच कवर्धा मेडिकल कॉलेज पर टिकी निगाहें

कवर्धा ख़बर योद्धा ।। कबीरधाम जिले के बहुप्रतीक्षित मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन स्थायी भवन पूरी तरह तैयार नहीं होने के कारण मान्यता प्रक्रिया अभी अंतिम चरण तक नहीं पहुंच सकी है। वहीं प्रशासन प्रारंभिक तौर पर 50 सीटों के साथ मेडिकल कॉलेज शुरू करने की तैयारी में जुटा है। जिलेवासियों को उम्मीद है कि यदि आगामी महीनों में आवश्यक मानकों की पूर्ति हो जाती है तो वर्षों पुराना मेडिकल कॉलेज का सपना जल्द साकार हो सकता है।

 

306 करोड़ की परियोजना से बदलेगी तस्वीर

 

कवर्धा के घोठिया रोड में लगभग 40 एकड़ भूमि पर 306.23 करोड़ रुपये की लागत से मेडिकल कॉलेज का निर्माण किया जा रहा है। दिसंबर 2025 में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना का भूमिपूजन किया था। जिले की सबसे बड़ी स्वास्थ्य एवं शैक्षणिक परियोजनाओं में शामिल यह मेडिकल कॉलेज भविष्य में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख केंद्र बनने की उम्मीद जगाए हुए है।

 

मेडिकल कॉलेज बनने से जिले के विद्यार्थियों को एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए बड़े शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा। साथ ही स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ चिकित्सकों और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता भी बढ़ेगी।

 

अस्थायी परिसर में 50 सीटों से शुरुआत की तैयारी

 

स्थायी परिसर के निर्माण में समय लगने की संभावना को देखते हुए प्रारंभिक चरण में 50 सीटों के साथ मेडिकल कॉलेज शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए जिला अस्पताल से लगे शासकीय आयुष पॉलीक्लिनिक भवन, उद्योग एवं व्यापार केंद्र तथा रोजगार कार्यालय भवन को अस्थायी शैक्षणिक परिसर के रूप में विकसित किया जा रहा है।

 

वर्तमान में इन भवनों में रंग-रोगन, मरम्मत और आवश्यक अधोसंरचनात्मक सुधार कार्य जारी हैं। उद्देश्य यह है कि मेडिकल कॉलेज संचालन के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाएं समय पर उपलब्ध हो सकें।

 

मान्यता प्रक्रिया पर टिकी सबसे बड़ी चुनौती

 

निर्माण कार्य और तैयारियों के बीच सबसे बड़ा सवाल मेडिकल कॉलेज की मान्यता को लेकर बना हुआ है। आम लोगों के बीच चर्चा है कि जब भवन निर्माण और अन्य तैयारियां चल रही हैं तो मान्यता मिलने में देरी क्यों हो रही है।

 

विशेषज्ञों के अनुसार मेडिकल कॉलेज का निर्माण और उसकी मान्यता दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। केवल भवन निर्माण से कॉलेज शुरू नहीं किया जा सकता। इसके लिए निर्धारित सभी शैक्षणिक और तकनीकी मानकों की पूर्ति आवश्यक होती है।

 

एनएमसी के मानकों पर खरा उतरना जरूरी

 

किसी भी मेडिकल कॉलेज को संचालन की अनुमति देने से पहले नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) द्वारा विस्तृत निरीक्षण किया जाता है। निरीक्षण के दौरान अस्पताल की क्षमता, फैकल्टी की उपलब्धता, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, छात्र सुविधाएं, उपकरण और अधोसंरचना सहित कई बिंदुओं की जांच की जाती है।

 

यदि किसी भी स्तर पर आवश्यक मानकों की कमी पाई जाती है तो मान्यता प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। यही कारण है कि स्थायी भवन का निर्माणाधीन होना भी एक महत्वपूर्ण पहलू माना जा रहा है।

 

उम्मीद बरकरार, समय अभी शेष

 

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का मानना है कि प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने में अभी पर्याप्त समय है। इस दौरान निर्माण कार्य को गति देने और एनएमसी के सभी मानकों की पूर्ति करने का प्रयास किया जा रहा है।

 

यदि आगामी महीनों में आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी हो जाती हैं और एनएमसी से स्वीकृति मिल जाती है, तो कबीरधाम जिले का वर्षों पुराना मेडिकल कॉलेज का सपना साकार हो सकता है। जिलेवासियों को उम्मीद है कि मेडिकल कॉलेज शुरू होने से शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक नया अध्याय जुड़ेगा।

 

फैक्ट फाइल

 

■ परियोजना लागत – 306.23 करोड़ रुपये

■ स्थान – घोठिया रोड, कवर्धा

■ कुल भूमि – लगभग 40 एकड़

■ प्रस्तावित प्रारंभिक सीटें – 50

■ भूमिपूजन – दिसंबर 2025

■ मान्यता एजेंसी – नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी)

■ अस्थायी परिसर – आयुष पॉलीक्लिनिक, उद्योग एवं व्यापार केंद्र एवं रोजगार कार्यालय भवन।

जितेन्द्र राज नामदेव

एडिटर इन चीफ - खबर योद्धा

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