पेड़ सिर्फ़ लकड़ी नहीं होते, ये हमारी साँसों का बैंक होते हैं : विवेक मोनू भंडारी वृक्षारोपण के साथ वृक्ष संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का आह्वा
कवर्धा खबर योद्धा ।। पर्यावरण संरक्षण और हरित भविष्य के उद्देश्य से समाजसेवी एवं पर्यावरण प्रेमी विवेक मोनू भंडारी ने नागरिकों से अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने तथा वृक्षों के संरक्षण के लिए आगे आने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन, बढ़ते तापमान, जल संकट और प्रदूषण जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे समय में वृक्ष मानव जीवन के लिए सबसे बड़े प्राकृतिक संरक्षक के रूप में कार्य कर रहे हैं। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति का यह नैतिक और सामाजिक दायित्व है कि वह वृक्षारोपण और वृक्ष संरक्षण को अपने जीवन का हिस्सा बनाए।

श्री भंडारी ने कहा कि अक्सर लोग पेड़ों को केवल लकड़ी, ईंधन या फर्नीचर बनाने का साधन समझते हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि पेड़ हमारी साँसों का बैंक हैं। जिस प्रकार बैंक में धन जमा कर भविष्य के लिए सुरक्षित रखा जाता है, उसी प्रकार वृक्ष वातावरण में जीवनदायी ऑक्सीजन का भंडार तैयार करते हैं और हानिकारक कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर पर्यावरण को संतुलित बनाए रखते हैं। यही कारण है कि वृक्षों को पृथ्वी के फेफड़े भी कहा जाता है।
उन्होंने कहा कि बढ़ती जनसंख्या, शहरीकरण और विकास कार्यों के नाम पर हो रही अंधाधुंध वृक्ष कटाई ने पर्यावरणीय संतुलन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। इसका परिणाम आज बढ़ती गर्मी, अनियमित वर्षा, सूखते जलस्रोत, भूजल स्तर में गिरावट और प्राकृतिक आपदाओं के रूप में सामने आ रहा है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ियों को और भी गंभीर पर्यावरणीय संकटों का सामना करना पड़ सकता है।
श्री भंडारी ने कहा कि वृक्ष केवल ऑक्सीजन प्रदान करने का कार्य ही नहीं करते, बल्कि वे जैव विविधता के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हजारों प्रकार के पक्षी, जीव-जंतु और कीट-पतंगे वृक्षों पर आश्रित रहते हैं। वृक्ष मिट्टी के कटाव को रोकते हैं, वर्षा चक्र को संतुलित बनाए रखते हैं तथा प्राकृतिक रूप से तापमान को नियंत्रित करने में सहायक होते हैं। शहरों में बढ़ती गर्मी को कम करने और स्वच्छ वातावरण बनाए रखने के लिए वृक्षों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि देशभर में विभिन्न सरकारी विभागों, सामाजिक संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों और स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान चलाए जा रहे हैं। यह एक सराहनीय पहल है, लेकिन केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है। पौधों की नियमित देखभाल, सुरक्षा, सिंचाई और संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। कई बार हजारों पौधे लगाए जाते हैं, लेकिन उचित देखभाल के अभाव में वे जीवित नहीं रह पाते। इसलिए वृक्षारोपण के साथ-साथ वृक्ष संरक्षण पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए।
श्री भंडारी ने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाए और उसकी देखभाल परिवार के सदस्य की तरह करे। यदि प्रत्येक नागरिक यह संकल्प ले ले, तो आने वाले वर्षों में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा परिवर्तन देखा जा सकता है।
उन्होंने विशेष रूप से बरगद, पीपल, नीम और अन्य दीर्घायु वृक्षों के संरक्षण पर बल दिया। उन्होंने कहा कि अक्सर मकानों की दीवारों, छतों, सड़कों के किनारों अथवा अन्य अनुपयुक्त स्थानों पर इन वृक्षों के छोटे-छोटे पौधे स्वतः उग आते हैं। अधिकांश लोग उन्हें बेकार समझकर उखाड़ देते हैं या नष्ट कर देते हैं, जबकि यही पौधे भविष्य में विशाल वृक्ष बन सकते हैं। बरगद और पीपल जैसे वृक्ष 150 वर्ष या उससे भी अधिक समय तक जीवित रहकर पर्यावरण और मानव समाज की सेवा करते हैं।
उन्होंने सुझाव दिया कि यदि ऐसे पौधे किसी ऐसी जगह उग आएँ जहाँ उनका विकास संभव नहीं है, तो उन्हें सावधानीपूर्वक जड़ों सहित निकालकर किसी उपयुक्त स्थान पर रोपित किया जाना चाहिए। थोड़ी सी देखभाल और संरक्षण मिलने पर यही पौधे भविष्य में हजारों लोगों को छाया, स्वच्छ वायु और पर्यावरणीय लाभ प्रदान कर सकते हैं।
श्री भंडारी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सहभागिता से ही इस दिशा में सार्थक परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। विद्यालयों, महाविद्यालयों, सामाजिक संगठनों, धार्मिक संस्थाओं और स्थानीय समुदायों को मिलकर वृक्षारोपण एवं संरक्षण के लिए जनजागरण अभियान चलाने चाहिए, ताकि अधिक से अधिक लोग इस अभियान से जुड़ सकें।
अंत में उन्होंने सभी नागरिकों से आह्वान किया कि वे वृक्षारोपण को केवल एक औपचारिक कार्यक्रम न मानकर जीवनभर निभाए जाने वाले संकल्प के रूप में स्वीकार करें। उन्होंने कहा कि आज लगाया गया और संरक्षित किया गया एक पौधा आने वाले दशकों तक पृथ्वी, पर्यावरण और मानवता की सेवा करता रहेगा। स्वच्छ वायु, संतुलित जलवायु और सुरक्षित भविष्य के लिए वृक्षों का संरक्षण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।


