छत्तीसगढ़ के 5000 स्कूलों में बेटियों के लिए टॉयलेट नहीं, चीफ जस्टिस बोले- सिस्टम की नाकामी
कोर्ट ने शिक्षा सचिव को शपथ पत्र के साथ किया तलब
19.54 लाख छात्राओं का भविष्य दांव पर
रायपुर खबर योद्धा विद्या भूषण दुबे।। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों की बदहाली को लेकर बिलासपुर हाईकोर्ट ने बेहद सख्त टिप्पणी की है। प्रदेश के 5,000 से अधिक स्कूलों में छात्राओं के लिए अलग शौचालय (Toilet) न होने पर चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने गहरी चिंता जताते हुए इसे शर्मनाक करार दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि बार-बार निर्देश देने के बावजूद जमीन पर कोई सुधार नहीं दिख रहा है।

दरअसल, जनवरी 2025 में दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यू-डीआइएसई (U-DISE) के चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए। रिपोर्ट के मुताबिक, छत्तीसगढ़ के 56,615 स्कूलों में से हजारों स्कूल ऐसे हैं जहां बेटियों के लिए बुनियादी सुविधा तक नहीं है। कोर्ट ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि शौचालयों की कमी के कारण छात्राएं स्कूल छोड़ने (Dropout) को मजबूर हैं, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बताया जाता है न्यायधानी बिलासपुर जिले के ही 160 से अधिक स्कूलों में टॉयलेट की गंभीर समस्या है, जबकि 200 से अधिक स्कूलों में बने हुए शौचालय कबाड़ हो चुके हैं। डिवीजन बेंच ने टिप्पणी करते हुए कहा कि शौचालयों की अनुपस्थिति से छात्राओं और महिला शिक्षकों में Urine Infection की घटनाएं बढ़ रही हैं। राज्य के 8,000 से अधिक स्कूलों में शौचालयों की स्थिति इतनी खराब है कि वे इस्तेमाल के लायक ही नहीं हैं। यूरिन इंफेक्शन से शिक्षक भी परेशान हैं
कोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को अगली सुनवाई 23 मार्च 2026 तिथि से पहले विस्तृत रिपोर्ट और शपथ पत्र पेश करना होगा। उन्हें बताना होगा कि आखिर अब तक इन स्कूलों में सुविधाओं का विस्तार क्यों नहीं हुआ।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में करीब 19.54 लाख छात्राएं पढ़ती हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, केवल 52,545 स्कूलों में ही लड़कियों के लिए क्रियाशील शौचालय हैं। यानी एक बड़ी आबादी आज भी बुनियादी हक से महरूम है।
इस सम्बंध में डॉ वर्णिका शर्मा अध्यक्ष छग राज्य बाल संरक्षण आयोग से उनके विचार जानने के लिए *20092 नंबर पर काल किया गया था ।
एक्सपर्ट व्यू
छ ग़ में छात्राओं के लिए शौचालय नहीं होने से सर्वप्रथम छात्राओं के मस्तिष्क पर असर पड़ सकता हैं, सार्वजनिक स्थान पर जाने से संकोच करेंगे । पेशाब को रोकेने का प्रयास से यूरीनरी इन्फेक्शन भी हो सकता हैं। खुले मैदान में करने से इंफेक्शन होने का अंदेशा रहता है। इंफेक्शन के कारण सर्दी, खांसी, बुखार आने की प्रबल संभावना रहती हैं ।
डॉ एन के यदु- Ex CMHO कवर्धा
