भोरमदेव में जल्द प्रारंभ होगा जंगल सफारी
भोरमदेव अभयारण्य: मैकल की वादियों में बसा वन्यजीवों का अद्भुत संसार, जल्द शुरू होगी जंगल सफारी
कवर्धा खबर योद्धा।। मैकल पर्वत श्रृंखला की हरियाली से आच्छादित भोरमदेव अभयारण्य प्राकृतिक सौंदर्य और जैव विविधता का अनूठा संगम है। लगभग 352 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला यह अभयारण्य न केवल प्राकृतिक संपदा से समृद्ध है, बल्कि प्रागैतिहासिक विशेषताओं को भी अपने भीतर समेटे हुए है।

यह अभयारण्य कान्हा राष्ट्रीय उद्यान और अचानकमार टाइगर रिजर्व के बीच एक महत्वपूर्ण वन्यजीव कॉरिडोर के रूप में कार्य करता है। चिल्फी घाटी के साथ जुड़ा यह क्षेत्र लंबे समय से वन्यप्राणियों की आवाजाही का प्रमुख मार्ग रहा है, जिसके कारण यहां पाई जाने वाली प्रजातियों में समानता भी देखने को मिलती है।
वर्ष 2001 में अधिसूचित इस अभयारण्य का नामकरण क्षेत्र के प्रसिद्ध भोरमदेव मंदिर के नाम पर किया गया, जिसे छत्तीसगढ़ का ‘खजुराहो’ भी कहा जाता है।

भोरमदेव अभयारण्य में बाघ, तेंदुआ, हिरण, भालू, वन भैंसा सहित अनेक वन्यजीवों का प्राकृतिक स्थल है। इसके अलावा यहां दुर्लभ पक्षियों की कई प्रजातियां भी देखने को मिलती हैं, जो इसे प्रकृति प्रेमियों और वन्यजीव फोटोग्राफरों के लिए खास बनाती हैं।

वर्तमान में यहां जंगल सफारी को लेकर कार्य प्रारंभ किया गया है, जो जल्द ही पर्यटकों के लिए खोल दिया जाएगा। इसके शुरू होते ही पर्यटक सुरक्षित तरीके से जंगल के भीतर जाकर वन्यजीवों के करीब से दीदार कर सकेंगे, जिससे क्षेत्र में पर्यटन को नई गति मिलने की उम्मीद है।

भोरमदेव अभयारण्य न केवल छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक धरोहर है, बल्कि यह आने वाले समय में प्रदेश का प्रमुख पर्यटन केंद्र बनने की ओर अग्रसर है।
