शिवाजी चौक की बदलती तस्वीर, सम्मान का स्थल या अनियंत्रित पार्किंग क्षेत्र

शिवाजी चौक की बदलती तस्वीर, सम्मान का स्थल या अनियंत्रित पार्किंग क्षेत्र

 

कवर्धा खबर योद्धा।। कवर्धा में छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती के अवसर पर जिस शिवाजी चौक का लोकार्पण उत्सव और आतिशबाजी के बीच हुआ था, वही चौक अब नई चिंता का विषय बन गया है। कुछ ही दिनों पहले शौर्य, स्वाभिमान और राष्ट्र गौरव के प्रतीक के रूप में स्थापित की गई प्रतिमा के आसपास आज सुबह से लेकर देर शाम तक वाहनों की लंबी कतारें नजर आती हैं। दोपहिया और चारपहिया वाहनों की अनियंत्रित पार्किंग ने चौक की सौंदर्यात्मक गरिमा को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। जिस स्थल को प्रेरणा केंद्र के रूप में विकसित करने की बात कही गई थी, वह अब व्यवस्था की कसौटी पर खड़ा दिखाई दे रहा है।

जयंती पर लोकार्पण, डिप्टी सीएम विजय शर्मा की मौजूदगी में हुआ भव्य अनावरण

19 फरवरी को छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती के अवसर पर नवनिर्मित शिवाजी चौक का लोकार्पण और प्रतिमा का विधिवत अनावरण किया गया था। 20 फरवरी को आयोजित भव्य समारोह में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके साथ दुर्ग ग्रामीण विधायक ललित चंद्राकर और नगर पालिका अध्यक्ष चंद्रप्रकाश चंद्रवंशी सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक मौजूद थे। समारोह के दौरान इसे शहर के गौरव और युवाओं के लिए प्रेरणा स्थल के रूप में प्रस्तुत किया गया था। चौक निर्माण, सौंदर्यीकरण और प्रतिमा स्थापना पर लाखों रुपये की राशि व्यय की गई। इसी अवसर पर शहर के अन्य प्रमुख चौक-चौराहों के विकास हेतु 20-20 लाख रुपये की स्वीकृतियों और सियान सदन निर्माण के लिए 30 लाख रुपये स्वीकृत किए जाने की घोषणा भी की गई थी।

उद्घाटन की चमक के बाद पार्किंग का दबाव

लोकार्पण के समय जिस चौक को सांस्कृतिक चेतना का केंद्र बताया गया, वहां वर्तमान में अनियोजित पार्किंग की स्थिति बन गई है। प्रतिमा के चारों ओर खड़े वाहन चौक की दृश्यात्मक संरचना को ढंक देते हैं। शाम के समय यातायात दबाव बढ़ने पर स्थिति और अधिक जटिल हो जाती है।

 

पार्किंग स्थान की कमी बना मुख्य कारण

स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों का कहना है कि चौक के आसपास नियोजित पार्किंग स्थल का अभाव इस समस्या की प्रमुख वजह है। बाजार और मुख्य मार्ग होने के कारण लोग सुविधा के अनुसार वाहन वहीं खड़े कर देते हैं। वैकल्पिक पार्किंग की स्पष्ट व्यवस्था न होने से चौक ही अस्थायी वाहन स्टैंड में परिवर्तित हो गया है। ऐसे में केवल सख्ती समाधान नहीं होगी, नगर पालिका को व्यवस्थित पार्किंग स्थल विकसित कर स्पष्ट दिशा-निर्देश लागू करने होंगे।

सौंदर्यीकरण के साथ प्रबंधन भी जरूरी

चौक पर सार्वजनिक संसाधन खर्च कर इसे शहर की नई पहचान के रूप में विकसित किया गया है। सौंदर्यीकरण तभी सार्थक होगा जब उसके साथ प्रभावी प्रबंधन भी सुनिश्चित किया जाए। पार्किंग निषेध संकेतक, बैरिकेडिंग, वैकल्पिक पार्किंग क्षेत्र चिह्नित करना और नियमित निगरानी जैसे कदम आवश्यक हैं। विशेषज्ञों का मत है कि प्रमुख चौक-चौराहों पर अनुशासित व्यवस्था ही उनकी गरिमा को बनाए रख सकती है।

 

 

जितेन्द्र राज नामदेव

एडिटर इन चीफ - खबर योद्धा

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