एसआइआर के बीच 400 से अधिक मुस्लिम मतदाताओं के नाम पर संकट, प्रशासन के दरवाजे तक पहुंची आवाज कार्रवाई की मांग
कवर्धा खबर योद्धा।। लोकतंत्र की बुनियाद माने जाने वाले मताधिकार को लेकर कवर्धा शहर में एक गंभीर सवाल खड़ा हो गया है। विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआइआर की प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की आशंका ने गुरुवार को बड़ा रूप ले लिया, जब मुस्लिम समाज के सैकड़ों लोग एसडीएम कार्यालय और जिला कार्यालय पहुंचे। मुद्दा केवल नाम कटने का नहीं, बल्कि उस प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों का है, जिसे लेकर अब प्रशासनिक पारदर्शिता और भरोसे की परीक्षा मानी जा रही है।
ज्ञापन देने पहुंचे लोगों का कहना है कि कवर्धा शहर के मुस्लिम बहुल इलाकों में रहने वाले 400 से अधिक मतदाताओं के नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 के जरिए शिकायतें दर्ज की गई हैं। इन शिकायतों को लेकर सबसे गंभीर पहलू यह बताया गया कि संबंधित मतदाताओं को अचानक नोटिस मिले, जबकि उन्हें अपने खिलाफ किसी शिकायत की जानकारी ही नहीं थी। इससे पूरे समुदाय में भय, असमंजस और की भावना गहराई है।
समाज के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि जिन लोगों के नाम से शिकायतें की गई हैं, वे कई मामलों में उसी वार्ड के निवासी नहीं हैं। कुछ प्रभावित मतदाताओं ने बताया कि जब उन्होंने कथित शिकायतकर्ताओं से संपर्क किया तो कई लोगों ने अपने नाम से किसी भी शिकायत से इनकार कर दिया। वहीं कुछ मामलों में शिकायतकर्ता बीएलओ के समक्ष उपस्थित होने से भी बचते नजर आए। इन परिस्थितियों ने फर्जीवाड़े और दुर्भावनापूर्ण शिकायतों की आशंका को और मजबूत किया है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एसआइआर प्रक्रिया के सबसे संवेदनशील पक्ष नो-मैपिंग मतदाताओं को भी चर्चा के केंद्र में ला दिया है। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार जिले में 3,702 मतदाता ऐसे हैं, जिन्हें नो-मैपिंग श्रेणी में रखा गया है। इनमें पंडरिया विधानसभा के 2,067 और कवर्धा विधानसभा के 1,635 मतदाता शामिल हैं। इन मामलों में वर्ष 2003 की आधार सूची में परिजनों के नाम नहीं मिलने का हवाला दिया गया है। इसके अलावा जिले में कुल 67,830 मतदाताओं के नाम हटाए जाने की प्रक्रिया प्रस्तावित है, जिसने चिंता को और गहरा दिया है।
मुस्लिम समाज ने प्रशासन के सामने स्पष्ट किया कि मताधिकार संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकार है और इसे बिना ठोस जांच छीना नहीं जा सकता। ज्ञापन सौंपते समय मांग की गई कि सभी संदिग्ध शिकायतों को निरस्त किया जाए और गलत तरीके से फॉर्म-7 भरने वालों पर कार्रवाई हो। इस पर एसडीएम चेतन साहू ने भरोसा दिलाया कि बिना निष्पक्ष जांच किसी का भी नाम नहीं हटाया जाएगा और फिलहाल सभी नाम यथावत रहेंगे।
हालांकि प्रशासन का कहना है कि एसआइआर सर्वे 18 दिसंबर को पूरा हो चुका है, प्रारंभिक सूची 23 दिसंबर को प्रकाशित की गई थी और 22 जनवरी तक दावा-आपत्ति का समय दिया गया था। अंतिम मतदाता सूची 21 फरवरी 2026 को प्रकाशित होनी है।
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