बस की चपेट में आया 30 वर्षीय युवक, मौके पर दर्दनाक मौत मिनिमाता चौक पर लोगों का फूटा गुस्सा, तीन घंटे तक लगा नेशनल हाईवे पर जाम  दारू भट्टी हटाए जाने की मांग फिर लोग उतरे सड़कों पर 

बस की चपेट में आया 30 वर्षीय युवक, मौके पर दर्दनाक मौत

मिनिमाता चौक पर लोगों का फूटा गुस्सा, तीन घंटे तक लगा नेशनल हाईवे पर जाम 

दारू भट्टी हटाए जाने की मांग फिर लोग उतरे सड़कों पर 

कवर्धा खबर योद्धा ।। बुधवार दोपहर शहर के मिनीमाता चौक पर तेज रफ्तार बस की चपेट में आने से एक 30 वर्षीय युवक की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। मृतक की पहचान राहुल पाली (पुत्र सुरेश पाली), निवासी कवर्धा के रूप में हुई, जो स्थानीय इलेक्ट्रॉनिक्स दुकान में मजदूरी करता था। घटना उस वक्त हुई जब वह दोपहर भोजन के बाद दुकान लौट रहा था। बस की रफ्तार इतनी तेज थी कि वह संभल भी नहीं सका और वहीं दम तोड़ दिया।

 

 

लोगों ने उठाई मुआवजे, नौकरी और कार्रवाई की मांग

 

हादसे के कुछ देर बाद स्थानीय नागरिकों ने सड़क पर उतर कर शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराया। खास बात यह रही कि प्रदर्शनकारियों ने शव को सड़क पर नहीं रखा, फिर भी पूरे घटनाक्रम में गहरी संवेदना और आक्रोश साफ झलक रहा था। मांगें तीन प्रमुख थीं—मृतक के परिवार को उचित आर्थिक मुआवजा, एक परिजन को सरकारी नौकरी और लापरवाह बस चालक पर कड़ी कार्रवाई।

 

 

नेशनल हाईवे पर तीन घंटे तक रहा चक्का जाम

बसों का रास्ता बदला गया, ट्रकों की लगी लंबी कतारें

आक्रोश इतना गहरा था कि बायपास करीब तीन घंटे तक एनएच-30 का ट्रैफिक पूरी तरह से बंद रहा। यात्री बेहाल रहे, दर्जनों बसों को वैकल्पिक मार्गों से बस स्टैंड लाया गया और भारी वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। गर्मी और भीड़ ने स्थिति को और कठिन बना दिया। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा और प्रशासन ने समझाइश देकर देर शाम तक जाम खत्म कराया।

 

पहले भी हो चुकी है ऐसी घटना, फिर भी नहीं चेता सिस्टम

दारू दुकान हटाने की मांग के दो माह बाद फिर जान गई

 

स्थानीय लोगो के अनुसार, ठीक दो महीने पहले भी इसी क्षेत्र में एक दुर्घटना हुई थी, जिसमें एक की मौत और एक व्यक्ति गंभीर घायल हुआ था। तब भी शराब दुकान हटाने और ट्रैफिक व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग उठी थी। लेकिन प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया और आज फिर एक जान चली गई।

 

सवाल वही: क्या अब भी नहीं जागेगा सिस्टम?

मूलभूत सुविधाओं का अभाव बन रहा जानलेवा

 

मिनीमाता चौक पर न स्पीड ब्रेकर हैं, न ट्रैफिक सिग्नल और न ही कोई सीसीटीवी। आए दिन यहां तेज रफ्तार बसें दौड़ती हैं और जिम्मेदार आंखें मूंदे बैठे हैं। राहुल की मौत केवल एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही की कीमत है। अब सवाल यही है—क्या अब भी कोई सुध लेगा, या अगली मौत के बाद फिर ऐसी ही रिपोर्ट लिखी जाएगी।

जितेन्द्र राज नामदेव

एडिटर इन चीफ - खबर योद्धा

 
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