108 माओवादियों ने 101 हथियारों के साथ किया सरेंडर ,3 करोड़ 95 लाख का था इन पर इनाम
रायपुर/जगदलपुर खबर योद्धा।। 31 मार्च की मियाद पूरी हो उसके 20 दिन पहले बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियानों को एक ऐतिहासिक सफलता मिली है। ‘पूना मारगेम : पुनर्वास से पुनर्जीवन’ पहल के अंतर्गत दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) से जुड़े 44 महिलाएँ और 64 पुरुष सहित 108 माओवादी कैडरों ने जगदलपुर में सामूहिक आत्मसमर्पण किया। इन सभी पर कुल 3 करोड़ 95 लाख रुपये का इनाम घोषित था। सरेंडर करने वालों में दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) के 6 डिविजनल कमेटी मेंबर शामिल हैं, जिन पर 8-8 लाख रुपये का इनाम था।

नक्सलियों द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर सुरक्षाबलों ने एक बड़ा डंप बरामद किया है, जिसमें ₹3.61 करोड़ नकद, एक किलो सोना (कीमत ₹1.64 करोड़) और 101 हथियार (AK-47, INSAS, आदि) जब्त किए गए हैं। जिन्होंने आत्मसमर्पण किया उनमें बीजापुर से 37, दंतेवाड़ा से 30, सुकमा से 18, बस्तर से 16, नारायणपुर से 4 और कांकेर से 3 शामिल हैं। इस सरेंडर के साथ ही सुरक्षा बलों (छत्तीसगढ़ पुलिस, CRPF, COBRA आदि) को अब तक की सबसे बड़ी नक्सली डंप बरामदगी मिली है। सरेंडर करने वाले कैडरों की निशानदेही पर विभिन्न स्थानों से 101 हथियारों के साथ 108 नक्सलियों का सरेंडर पर 1 किलो सोना और साढ़े 3 करोड़ नगद बरामद होने की बताई जाती है।

यह बरामदगी नक्सल विरोधी अभियानों के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी मानी जा रही है। बस्तर आईजी पी. सुंदरराज ने इसे क्षेत्र की बदलती तस्वीर बताया और जोर दिया कि यह पहल केवल हथियार छुड़ाने तक सीमित नहीं, बल्कि भटके हुए युवाओं को सम्मानजनक जीवन प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। 108 माओवादी कैडरों का सामूहिक आत्मसमर्पण और उसके साथ जुड़ी अब तक की सबसे बड़ी डंप बरामदगी स्पष्ट संकेत देती है कि नक्सल संगठनों की आर्थिक और सैन्य ताकत अब टूटने की कगार पर है।
केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित 31 मार्च 2026 की समय-सीमा से महज 20 दिन पहले यह उपलब्धि ‘नक्सल मुक्त भारत’ के लक्ष्य को वास्तविकता के निकट ला रही है। ‘पूना मारगेम’ जैसी पुनर्वास नीतियाँ “जो हिंसा छोड़ने वालों को रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सम्मान का आश्वासन देती हैं, सिद्ध कर रही हैं कि विकास और संवाद बल प्रयोग से अधिक प्रभावी हथियार हैं।
