पर्यवेक्षकों की उम्मीद वेतन विसंगति होगी दूर शासन पहले ही तुलनात्मक आधार मांग को कर चुकी है खारिज
रायपुर ख़बर योद्धा विद्याभूषण दुबे ।। पर्यवेक्षक पद की वेतन विसंगति दूर करने के मामले में संचालक महिला एवं बाल विकास ने प्रमुख सचिव को एकबार फिर पत्र भेजकर पर्यवेक्षकों में उम्मीद की किरण जगा दी है। यद्यपि लगभग एक साल पहले भी 19 मई 2025 को भी इसी आशय का पत्र भेजा गया था जिस पर कार्यवाही लंबित है।
अन्य राज्यों के पर्यवेक्षकों को कितना वेतनमान दिया जा रहा है इसका तुलनात्मक अध्ययन करने के लिए 10 राज्यों के मबाविवि को पत्र भेजा गया था। जिसमें से मात्र दो राज्यों मध्यप्रदेश और झारखंड ने जवाबी पत्र भेजा है। उल्लेखनीय है कि छग मबाविवि के द्वारा झारखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब ,मध्य प्रदेश ,उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, जम्मू कश्मीर, मणिपुर, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के मबाविवि से आईसीडीएस योजना अंतर्गत पदस्थ पर्यवेक्षकों के वेतनमान की जानकारी चाही गई थी।
गौर करने करने वाली बात यह है कि छत्तीसगढ़ राज्य मध्य प्रदेश से अलग होकर बना है इसलिए दोनों राज्यों में भर्ती नियम, पदोन्नति नियम और वेतनमान समान है। रही बात झारखंड की टू झारखंड में वेतनमान 9300 है और ग्रेड पे 4200 है जबकि छत्तीसगढ़/मध्यप्रदेश में वेतनमान 5200 और ग्रेड पे 2400 है।
ऐसी स्थिति में केवल एक राज्य झारखंड से जानकारी मिलना विभागीय प्रयासों को पलीता लगने वाली बात है। यहां उल्लेखनीय है कि अन्य राज्यों से तुलनात्मक आधार बनाकर पर्यवेक्षकों के अधिक वेतन की मांग को डी एन तिवारी एकल समिति के द्वारा बहुत पहले ही खारिज किया जा चुका है। ऐसी स्थिति में अब सरकार क्या निर्णय लेती है देखने वाली बात है । वहीं दूसरी तरफ विभागीय पत्र पर श्रेय लेने का भी प्रयास कतिपय कर्मचारी संघों के द्वारा वाट्सएप में किया जाने लगा है।
समस्याओं के लिए समिति
कर्मचारियों की समस्याओं एवं मांगों की समीक्षात्मक प्रक्रिया आरंभ करने के लिए सामान्य प्रशासन विभाग के द्वारा IAS निहारिका बारीक की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है। समिति के द्वारा केवल मान्यता प्राप्त संघों को बैठक में बुलाया जाता है और मबाविवि का संघ मान्यता प्राप्त नहीं है।
